Tag: Hindi Poems
प्रभाती Prabhati आया प्रभात चन्दा जग से कर चुका बात गिन-गिन जिनको थी कटी किसी की दीर्घ रात अनगिन किरणों की भीड़भाड़ से भूल गए पथ, और खो गए, …
सभी लुजलुजे हैं Sabhi Lujluje hai खोंखियाते हैं, किंकियाते हैं, घुन्ना ते हैं चुल्लुा में उल्लूक हो जाते हैं मिनमिनाते हैं, कुड़कुड़ाते हैं सो जाते हैं, बैठ जाते हैं, …
मेरी स्त्री Meri stri प्यारे दर्शको, यह जो स्त्री आप देखते हैं सो मेरी स्त्री है इसकी मुझसे प्रीति है । पर यह भी मेरे लिए एक विडम्बना है …
बेटे से Bete se टूट रहा है यह घर जो तेरे वास्ते बनाया था जहाँ कहीं हो आ जाओ … नहीं यह मत लिखो लिखो जहाँ हो वहीं अपने …
डर Dar बढ़िया अँग्रेज़ी वह आदमी बोलने लगा जो अभी तक मेरी बोली बोल रहा था मैं डर गया ।
मेरे अनुभव Mere anubhav कितने अनुभवों की स्मृतियाँ ये किशोर मुँह जोहते हैं सुनने को पर मैं याद कर पाता हूँ तो बताते हुए डरता हूँ कि कहीं उन्हें …
निंदा Ninda तुम निंदा के जितने वाक्य निंदा में कहते हो वे निंदा नहीं रह गए हैं और केवल तुम्हारी घबराहट बताते हैं
मेरा जीवन Mera jeevan मेरा एक जीवन है उसमें मेरे प्रिय हैं, मेरे हितैषी हैं, मेरे गुरुजन हैं उसमें कोई मेरा अनन्यतम भी है पर मेरा एक और जीवन …