कुछ मुक्तक
Kuch Mukatak
1.
अफ़सोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सके,
झोलियाँ किसी की भर न सके, संताप किसी का हर न सके,
अपने प्रति सच्चा रहने का, जीवन भर हमने काम किया,
देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके ।
2.
कुछ देर यहाँ जी लगता है
कुछ देर तबियत जमती है
आँखों का पानी गरम समझ
यह दुनिया आँसू कहती है
Read More Hindi Poem of Trilochan “Vasant“ , “वसंत” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12
