Munshi Premchand Hindi Story, Moral Story on “Vah Abhaga”, ”वह अभागा” Hindi Short Story for Primary Class, Class 9, Class 10 and Class 12

वह अभागा

 Vah Abhaga

 चीन के दूसरे भागों की भांति ल्यूचेन में शराब की दुकानों नहीं हैं। उन सब पर सड़क की ओर मुंह किये काउण्टर हैं। वहां पर शराब को गर्म करने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था रहती है। दोपहर या शाम को लोग अपने काम से छुट्टी पाकर वहां आते हैं और एक प्याली शराब खरीद लेते हैं। बीस साल पहले उसके लिए चार कैश1 लगते थें, अब दस देने पड़ते हैं। काउण्टर के सहारे खड़े होकर वे गरमागरम शराब पीते हैं और अपनी थकान दूर करते हैं। कुछ कैश देकर खाने की चीजों भी ली जा सकती हैं। इन ग्राहकों में अधिकतर ऊंचे कोटवाले गरीब तबके के लोग होते हैं। उनमें से शायद ही किसी के पास ज्यादा पैसे होते हों। सिर्फ लम्बे चोंगे पहने धनी ही बराबर के कमरे में जाते हैं और वहां बैठकर आराम से खाते-पीते हैं। बाहर साल की उम्र में मैंने शहर के किनारे वाले सियेन हैंग शराबघर में बैरे के रूप में काम करना शुरू किया था। शराबघर के मालिक ने कहा कि लम्बे चोंगे वाले खुशहाल ग्राहको को खिलाने-पिलाने के ख्याल से मैं बड़ा बुद्धू दिखाई देता हूं, इसलिए मुझे बाहर के कमरे में कुछ काम सौपा गया। हालांकि छोटे कोटवालेक गरीब ग्राहक लम्बे चोंगे वाले अमीरों की निस्बत ज्यादा आसानी से खुश हो जाते थे,लेकिन उनमें कुछ बहुत ही झगड़ालू किस्म के भी होते थे। वे खुद अपनी आंखों से पीपे में से ढलती शराब देखने का आग्रह रखते थे, जिससे उन्हें पता चल जाय कि शराब के बर्त्तन की तली में पानी तो नहीं है और उसे गर्म पानी में ठीक से रखा गया या नहीं। जब इतनी बारीकी से जांच की जाती थी तो शराब में पानी मिलाना गड़ा मुश्किल था। इसलिए कुछ ही दिन बाद मेरे मालिक ने तय किया कि मैं इस काम के लायक नहीं हूं। खुशकिस्मती से मेरी सिफारिश किसी प्रभावशाली आदमी ने की थी, इससे वह मुझे बरखास्त तो नहीं कर सकता था। मेरी बदली शराब को गर्म करने नीरस काम पर कर दी गई। तब से दिन भर मैं काउण्अर के पीछे खड़ा रहता और पूरी तरह अपने काम को अंजाम देता रहता।हालांकि मेरे इस काम से मालिक को संतोष मालूम होता था, लेकिन वह काम मुझे फिका और फालतू मालूम होता था।हमारा मालिक देखने में बड़ी खूंखार लगता था और ग्राहक रूखे होते थे, सो वहां खुश रहना असंभव था। बस कुंग-ची के शराबघर में आने पर मेरी हंसी सुनाई देती थी। यही वजह है कि वह मुझे अब तक याद आता है। कुंग-ची लम्बे लबादे वाला एक ग्राहक था,जो खड़े होकर शराब पीता था। वह लम्बे कद का आदमी था। उसके चेहरे का कुछ अजीब-सा रंग था और उसके मुंह की झुर्रियों के बीच घाव के निशान दिखाई देते थे। उसके लम्बी दाढ़ी थी, जिसके बाल बेतरतीबी से बिखरे रहते थे। यद्यपि वह लंम्बा चोंगा पहनता था, लेकिन वह चोंगा गंदा और फटा हुआ था।लगता था, मानो दस साल से न तो धुला है, न उसकी मरम्त हुई है। अपनी बातचीत में वह इतने ज्यादा पुराने मुहावरे बोलता था कि जो कुछ वह कहता था, उसका आधा भी समझ पाना असंभव था। वह जब भी दुकान में आता था, हर आदमी उसकी ओर देखता था और मुस्करा उठता था। कोइ-कोई कहता था, “कुंग, तुम्हारे चेहरे पर कुछ ताजे निशान दिखाई दे रहे हैं।” बिना उस ओर ध्यान दिये वह काउण्टर पर आकर कहता, “दो प्याले गर्म शराब लाओ और एक प्लेट मसालेदार फलियां।” उसका पैसा चुका देता। इसी बीच जानबूझकर ऊंची आवाज में कोई बोल पड़ता, ‘‘तुम फिर चोरी करने लगे होगे।’’ आंखें फाड़कर वह कहता, “किसी भले आदमी के आदमी के नाम पर बिना बात क्यों बट्टा लगाते हो?” “भले आदमी के नाम पर! अरे, परसों ही तो मैंने तुम्हें हो-परिवार से किताबें चुराने पर ठुकते देखा था।”

Read More  Hindi Short Story and Hindi Moral Story on “Prabdh Aur Purusharth” , “प्रारब्ध और पुरुषार्थ” Complete Hindi Prernadayak Story for Class 9, Class 10 and Class 12.

इस पर कुंग लाल-पीला हो उठता। उसके माथे की नसें उभर आतीं और वह बिगड़कर कहता, “किताब लेने को चोरी नहीं माना जा सकता।….किताब लेन, यह तो विद्वान का काम है। नही, उसे चोरी नहीं कहा जा सकता।” फिर वह पुराने ग्रंथों के हवाले देता, जैसे “पूर्ण व्यक्ति गरीबी संतुश्ट रहता है,” और ऐसे पुरातन उद्धरण वह तब तक देता रहता, जबतक कि हर आदमी हंसी से लोटपोट न हो जाता और सारे शराबघर में आनंद की लहर न दौड़ने लगती। लोगों की गपशप से पता चला कि कुंग ने प्राचीन साहित्य का अध्ययन अवश्य किया था,लेकिन कोई सरकारी परीक्षा उसने उत्तीर्ण नहीं की थी। उसके पास कोई कमाई का कोई साधन भी नहीं था। वह दिन-ब-दिन गरीब होता गया और अंत में भीख मांगने की हालत में आ गाया। भाग्य से उसकी लिखावट अच्दी थी और अपनी गुजर-बसर करने के लिए नकल करने का उसे काफी काम मिल जाता था। दुर्भाग्य से उसमें कमियां थीं। उसे शराब पीना अच्छा लगता था और वह काहिल भी था। इसलिए कुछ दिन के बाद जरूरी तौर पर वह गायब हो जाता था और अपने साथ किताबें, कागज, ब्रुश और स्याही ले जाता था। जब ऐसा कई बार हो चुका तो नकल करने के लिए कोई भी उसे काम पर लगाने को राजी नहीं हुआ। अब उसके सामने सिवा चोरी करने के कोई चारा न था। फिर भी हमारे शराबघर में उसका व्यवहार आदर्श था। अपने कर्ज का भुगतान करने में वह कभी नहीं चूका। कभी-कभी उसके हाथ में पैसा नहीं होता था, तब उसका नाम कर्जदारों की सूची में बोर्ड पर लगा दिया जाता था। पर महीने भर से कम में ही हिसाब साफ कर देता था और उसका नाम बोर्ड पर से हटा दिया जाता था आधा प्याला शराब पी लेने के बाद कुंग का दिमाग ठीक हो जाता था। लेकिन तभी कोई पूछ बैठता था, “कुंग, क्या तुम सचमुच पढ़ना-लिखना जानते हो?” तब कुंग इस प्रकार देखता था, मानो इस प्रकार का सवाल उसका तिरस्कार करने के लिए पूछा गया हो। वे आगे कहते थे, “यह क्या बात है कि तुमने सबसे मामूली सरकारी इम्तहान भी पास नहीं किया?” इस प्रश्न को सुनकर कुंग बेचैन हो उठता। उसका चेहरा जर्द पड़ जाता और उसके होंठ कांपने लगते, लेकिन उसके मुंह से समझ में न आने योग्य पुराने कथन ही निकलते। लोग खिलखिलाकर हंसने लगते और सारा शराबघर आनंदित हो जाता। ऐसे समय में मैं भी उसी हंसी में शामिल हो जाता, क्योंकि ऐसा करने के लिए मेरा मालिक मुझे फटकारता नहीं था। दरअसल वह स्वयं कुंग से ऐसे सवाल करता, जिससे हंसी फूट पड़े। यह जानते हुए कि बच्चों से बात करने से कोई फयदा नहीं है, कुंग हमसे बातें करता। एक बार उसने मुझसे पूछा, “तम्हें स्कूल में पढ़ने का मौका मिला है?” मेरे सिर हिलाने पर उसने कहा, “अच्छा, मैं तुम्हारी जांच करूगा। तुम ह्मू-सियांग हा ‘ह्म’ अक्षर कैसे लिखोगे?” मैनें सोचा, “मैं एक भिखारी द्वारा अपना इम्तहान क्यों होने दूं।” इसलिए मैंने मुंह फेर लिया और उसकी उपेक्षा कर दी। कुछ देर प्रतीक्षा करके उसने बड़े प्यार से कहा, “क्या तुम इसे नही लिख सकते हो? मैं तुम्हें बताऊंगा कि कैसे लिख सकते हो? तुम इस याद रखना। जब तुम्हारी अपनी दुकान होगी तो तुम्हें उसकी जरूरत पड़ेगी।” मझे बहुत दिनों तक अपनी दुकान होने की आशा नहीं दिखाई देती थी। इसके अलावा हमारा मालिक ह्मू-सियांग फलियों को कभी रोकड़ बही में दर्ज नहीं करता था। उसकी बात से थोड़ा प्रसन्न होकर, फिर भी कुछ खीजकर, मैने जवाब दिया, “कौन चाहता है कि आप बढ़ावें? क्या ‘ह्मू’ अक्षर भारी नहीं है?” कुंग खुश हो गया। उसने अपने हाथ के दो लम्बे नाखूनों से काउण्टर का टिकटिका कर कहा, “तुम ठीक कहते हो। ‘ह्म’ लिखने के सिर्फ चार अलग-अलग तरीके हैं। क्या तुम उन्हें जानते हो?” मेरा धीरज समाप्त हो चला था। मैने त्योरी चढ़ाई और वहां से चल पड़ने को हुआ। कुंग ने अपनी उंगली शराब में ड़बोई, जिससे काउण्टर पर उन अक्षरो को लिख सके। किन्तु जब उसने मेरी उदासीनता देखी तो एक आह भरी। उसकी आंखों में व्यथा झलक रही थी। कभी-कभी पास-पड़ोस के बच्चे हंसी सुनकर उस मनोरंजन में भाग लेने आ जाते और कुंग को घेर लेते। तब वह उनमें हरएक को मसाले भरी एक-एक फली देता। उसे खाकर बच्चे भी उसका पीछा न छोड़ते।उनकी निगाहें खाने-पीने की चीजों पर लगी रहतीं। कुंग रकाबियों को अपने हाथ से ढकेलता और आगे झेककर कहता, “जाओ, अब कुछ नहीं है।” इस पर बच्चे शोर मचाते और हंसी की फुहारें छोड़ते चले जाते।इतना मजेदार था कुंग।

पतझड़ के उत्सव से कुछ दिन पहले एक दिन शराबघर का मालिक अपना हिसाब पूरा करने पर जुटा था। अचानक निगाह उठाकर बोला, “कुंग बहुत दिनों से नहीं आया, उसकी ओर उन्नीस कैश निले रहे हैं। मलिक की इस बात से हमें पता लगा कि कुंग को कितने दिनों से नहीं देखा है। “वह आयेगा कैसे,” एक ग्राहक ने कहा,”उस पर इतनी मार पड़ी है कि उसकी टांगे टूट गई हैं।” “अच्छा!” “वह चोरी कर रहा था। उसने इस बार बड़ी मूर्खता की कि सूबे के विद्वान मिटिंग के यहां चोरी करने गया, जैसे वह वहां पकड़ा ही नहीं जायगा।” “फिर क्या हुआ?” “होता क्या, उसने लिखकर अपना अपराध कबूल किया, फिर उसकी मरम्मत हुई। बेचारा सारी सारी पिटता रहा, जब तक कि उसकी टांगें टूट न गईं।” “फिर।” “फिर क्या, टांगें गईं!” “सो तो ठीक है, उसके बाद क्या हुआ?” “उसके बाद?…कौन जाने, वह चल बासा हो।” उस उत्सव के बाद ज्यों-ज्यों जाड़ा आता गया, हवा ठंडी होती गई। मैं अपना समय अंगीठी के सहारे गुजारता। एक दिन दोपहर बीत जाने पर दुकान खाली थी और मैं आंखें बन्द किये बैठा था कि आवाज आई, “एक प्याला शराब गरम करो।” यह सुनकर मेरा मालिक काउण्टर पर आगे झुका और बोला, “ओहो, कुंग, तुम हो? तुम्हारी तरफ हमारे उन्नीस कैश निकल रहे हैं।” “उन्हें मै फिर चुका दुगां।” बेचैनी से देखते हुए कुंग बोला, “ये लो अभी के पैसे, एक प्याला बढ़िया शराब दो।” मालिक बड़बड़ाया और बोला, “कुंग, तुम फिर चोरी करने लगे!” इस बात का जोर से खण्डन करने के बजाय कुंग ने कहा, “आपने यह भी खूब पूछा! अपना मजाक छोड़ो।” “मजाक! अगर तुमने चोरी नहीं की तो तुम्हारी टांगें कैसे टूटी?” “मैं गिर गया था।” कुंग ने धीमी आवाज में कहा, “गिरने से मेरी टांगों में चोट आ गई।” कुंग की आंखें जैसे मालिक से कह रही थीं कि इस बात को आगे मत बढ़ाओ। अबतक बहुत से लोग इकट्ठे हो गये थे और हंसने लगे थे। मैंने शराब गरम की और उसे दे दी। उसने अपने फटे कोट की जेब से चार कैश निकाले और मेरे हाथ में थमा दिये। मैंने देखा, उसके हाथों में धूल-मिट्टी लगी थी। वह शायद हाथों के बल चलकर आया था। उसने शराब का प्याला खत्म किया और लोगों के हंसी-मजाक के बीच हाथों के सहारे चला गया। इसके बाद फिर बहुत दिन गुजर गये। कुंग दिखाई नहीं दिया। एक दिन शराबघर के मालिक ने हिसाब देखा तो बोला, “कुंग के हिसाब में अब उन्नीस कैश पड़े हैं।” अगले साल एक दूसरा उत्सव आया तो मालिक ने फिर वही बात दोहराई, लेकिन जब पतझड़ का उत्सव आया तो उसने उसकी बाबत कुछ नहीं कहा। नये साल का आगमन हुआ, पर कुंग को फिर कभी हमने नहीं देखा। शायद उसकी सचमुच मृत्यु हो गई।

Read More  Akbar Birbal Hindi Story, Moral Story “Tota na khata he na pita he”, ”तोता ना खाता है ना पीता है...” Hindi Motivational Story for Primary Class, Class 9, Class 10 and Class 12

समाप्त

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

https://nongkiplay.com/ samson88 samson88 samson88 kingbokep jenongplay samson88 dausbet dausbet cagurbet samson88 dausbet slot777 cagurbet slot mpo dausbet cagurbet samson88 dausbet https://www.chabad.com/videos/ cagurbet bintang4d samson88 karinbet cagurbet samson88 samson88 karinbet samson88 samson88 samson88 samson88 dausbet cagurbet dausbet cagurbet samson88 karinbet cagurbet dausbet cariwd88 samson88 cagurbet jamur4d cariwd88 basarnasbogor.com cagurbet cariwd88 dausbet samson88 samson88 samson88 karinbet samson88 cagurbet karinbet karinbet cariwd88 dausbet cagurbet surga 898 lobi89 lobi89 akun pro thailand cagurbet cagurbet samson88 cariwd88 cariwd88 cariwd88 cagurbet cariwd88 cariwd88 apk slot cagurbet samson88 slot terpercaya situs slot apk slot APK SLOT slot thailand bolang 588 cariwd88 cagurbet cagurbet samson88 cagurbet cagurbet cagurbet dausbet dausbet samson88 cariwd88 cagurbet cariwd88 cariwd88 cagurbet samson88 samson88 cariwd88 dausbet cagurbet macan238 cariwd88 samson88 cariwd88 samson88 apk slot apk slot omo777 dausbet samson88 cariwd88 cagurbet dausbet samson88 samson88 cagurbet
https://nongkiplay.com/ samson88 samson88 samson88 kingbokep jenongplay samson88 dausbet dausbet cagurbet samson88 dausbet slot777 cagurbet slot mpo dausbet cagurbet samson88 dausbet https://www.chabad.com/videos/ cagurbet bintang4d samson88 karinbet cagurbet samson88 samson88 karinbet samson88 samson88 samson88 samson88 dausbet cagurbet dausbet cagurbet samson88 karinbet cagurbet dausbet cariwd88 samson88 cagurbet jamur4d cariwd88 basarnasbogor.com cagurbet cariwd88 dausbet samson88 samson88 samson88 karinbet samson88 cagurbet karinbet karinbet cariwd88 dausbet cagurbet surga 898 lobi89 lobi89 akun pro thailand cagurbet cagurbet samson88 cariwd88 cariwd88 cariwd88 cagurbet cariwd88 cariwd88 apk slot cagurbet samson88 slot terpercaya situs slot apk slot APK SLOT slot thailand bolang 588 cariwd88 cagurbet cagurbet samson88 cagurbet cagurbet cagurbet dausbet dausbet samson88 cariwd88 cagurbet cariwd88 cariwd88 cagurbet samson88 samson88 cariwd88 dausbet cagurbet macan238 cariwd88 samson88 cariwd88 samson88 apk slot apk slot omo777 dausbet samson88 cariwd88 cagurbet dausbet samson88 samson88 cagurbet