Hindi Poem of Dinesh Singh “Dukh ke naye tarike”,”दुख के नए तरीके” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

दुख के नए तरीके

 Dukh ke naye tarike

सिर पर

सुख के बादल छाए

दुख नए तरीके से आए

घर है, रोटी है, कपडे हैं

आगे के भी कुछ लफड़े हैं

नीचे की बौनी पीढ़ी के,

सपनों के नपने तगड़े हैं

अनुशासन का

पिंजरा टूटा

चिडिया ने पखने फैलाए

दुख नए तरीके से आए

जाँगर-जमीन के बीच फँसे

कुछ बड़ी नाप वाले जूते

हम सब चलते हैं सडकों पर

उनके तलुओं के बलबूते

इस गली

उस गली फिरते हैं

जूतों की नोकें चमकाए

दुख नए तरीके से आए

Read More  Hindi Poem of Sumitranand Pant “Bapu Ke Prati ”, “बापू के प्रति” Complete Poem for Class 10 and Class 12

सुविधाओं की अंगनाई में,

मन कितने  ऊबे-ऊबे हैं

तरूणाई के ज्वालामुख,

लावे बीच हलक तक डूबे हैं

यह समय

आग का दरिया है,

हम उसके माँझी कहलाए

दुख नए तरीके से आए!

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.