दर्शन
Darshan
आदमी के बनाए हुए दर्शन में
दिपदिपाते हैं सर्वशक्तिमान
उनकी साँवली बड़ी आँखों में
कुछ प्रेम, कुछ उदारता, कुछ गर्वीलापन है
भव्य वह भी कम नही है
जो इंजीनियर है
इस विराट वास्तुशिल्प का
दलित की दृष्टि में कौतुक है
दोनों पक्षों कि लिए
यानी प्रभु की सत्ता और
बुर्जुआ के उदात्त के लिए
एक अवाक् जिज्ञासा है कि
ऐसा कैसे हुआ
ऐसा कैसे हुआ!!!
Read More Hindi Poem of Makhan Lal Chaturvedi “Vayu , “वायु” Complete Poem for Class 10 and Class 12
