पुनर्नवा Punarva दर्पण नहीं स्वयं को देख रही हूँ तुम्हारी आँखों से! .. ऐसे देखा नहीं था कभी नई-सी लग रही हूँ अपने आप को . तुम्हारी दृष्टि …
कांस्य युग Kansya Yug सिंधु घाटी सभ्यता का विकास ताम्र पाषाण युग में ही हुआ था, पर इसका विकास अपनी समकालीन सभ्यताओं से कहीं अधिक हुआ । इस काल …
गौरी-शंकर Gauri shankar एक बार भोले शंकर से बोलीं हँस कर पार्वती, ‘चलो जरा विचरण कर आये,धरती पर कैलाशपती! विस्मित थे शंकर कि उमा को बैठे-ठाले क्या सूझा, …
समर-शेष Samar shesh मत छीनो मुझसे ये शब्द! धरोहर है पीढ़ियों की . शताब्दियों की, सहस्राब्दियों की. बहुत कुछ खो चुकी हैं आनेवाली पीढ़ियाँ, अब ग्रहण करने दो …
भारत का इतिहस – संक्षिप्त विवरण Bharat ka Itihas – Summery भारत विश्व की सबसे पुरानी सम्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। …
ससुरारै में निदिया सताये रे! Sasurare me nindiya sataye re ससुरारै में निदिया सताये रे, जी भर के कबहुँ ना सोय पाय रे मोरी अक्कल चरै का चलि …
ओ रे, सावन इस बार जरा जल्दी आना! O re sawan is baar jara jaldi aana आ रही याद जाने कितनी उस आँगन की, क्या पता कहीं कुछ …
छिनाय गयो हमरो ही नाम Chinay gyo hamro hi naam आजु तो न्योति के बिठाई रे कन्या हलवा पूरी औ’पान सोई बिटेवा,परायी अमानत, चैन गा सब का पलान! …