अश्रु-सरिता के किनारे Ashru sarita ke kinare अश्रु-सरिता के किनारे एक ऐसा फूल है जो कभी कुम्हलाता नहीं है! दूर उन सुनसान जीवन-घाटियों के बीच की अनजान सी …
गजराज व मूषकराज Gajraj va mushakraj प्राचीन काल में एक नदी के किनारे बसा नगर व्यापार का केन्द्र था। फिर आए उस नगर के बुरे दिन, जब एक वर्ष …
अभिशप्त Abhishapt रात का धुँधलका, सिर्फ़ तारों की छाँह, मैंने देखा मन्दिर से निकल कर एक छायामूर्ति चली जा रही है विजन वन की ओर! आश्चर्य-चकित मैंने पूछा, …
खरगोश की चतुराई Khargosh ki chaturai किसी घने वन में एक बहुत बड़ा शेर रहता था। वह रोज शिकार पर निकलता और एक ही नहीं, दो नहीं कई-कई जानवरों …
अपराधी Apradhi बिगाड़ना बहुत आसान है – उसके लिये जो बना नहीं सकता! पशुबल सबसे प्रबल है, कि विवेक से नाता नहीं रखता, जुनून जो कर ड़ाले, भविष्य …
यात्री Yatri मौन, मैं अनजान फिर बोलो कहाँ आवास मेरा! जिन्दगी की राह रुकने को नहीं विश्राम-बेला, आज है यदि साथ लेकिन कल कहीं रहना अकेला! राह में …
कौए और उल्लू Kova aur ullu बहुत समय पहले की बात हैं कि एक वन में एक विशाल बरगद का पेड कौओं की राजधानी था। हजारों कौए उस पर …
सोने का हिरन Sone ka hiran काहे राम जी से माँग लिया सोने का हिरन, सोनेवाली लंका में जा के रह ले सिया! अनहोनी ना विचारी जो था …