ओ प्रिया O Priya ओ प्रिया पिन्हाऊँ तुम्हें जुही के झुमके। इस फूली संझा के तट पर, आ बैठें बिल्कुल सट-सटकर, दृष्टि कहे जो उसे सुनें तो अर्थ …
चल इंशा अपने गाँव में Chal insha apne gaun me यहाँ उजले उजले रूप बहुत पर असली कम, बहरूप बहुत इस पेड़ के नीचे क्या रुकना जहाँ साये कम, …
जस का तस Jas ka tas शाख़-शाख़ बुलबुल लिखती है पत्ता-पत्ता गुल लिखती है । बेटी माँ से जो पढ़ती है बच्चों में वो कुल लिखती है । …
जल्वा-नुमाई बेपरवाई हाँ यही रीत जहाँ की है Jalva numai beparvai ha yahi reet jaha ki he जल्वा-नुमाई बेपरवाई हाँ यही रीत जहाँ की है कब कोई लड़की मन …
दृश्य घाटी में Drishya ghati me बीत गए दिन फूल खिलने के। होती हैं केवल वनस्पतियाँ हरी-हरी-सी हर गली हर मोड़ पर बैठी मौत अपनी बाँह फैलाकर। बर्फ़-सा …
फ़क़ीर बन कर तुम उनके दर पर हज़ार धुनि रमा के बैठो Fakeer ban kar tum unke dar par hazar dhuni rma ke betho फ़क़ीर बन कर तुम उनके …
यात्रा के बाद भी Yatra ke baad bhi यात्रा के बाद भी पथ साथ रहते हैं। हमारे साथ रहते हैं। खेत खम्भे-तार सहसा टूट जाते हैं, हमारे साथ …
सुनते हैं फिर छुप छुप उन के घर में आते जाते हो Sunte he fir chup chup un ke ghar me aate jate ho सुनते हैं फिर छुप छुप …