घर नियराया Ghar niyraya जैसे-जैसे घर नियराया। बाहर बापू बैठे दीखे लिए उम्र की बोझिल घड़ियाँ। भीतर अम्माँ रोटी करतीं लेकिन जलती नहीं लकड़ियाँ। कैसा है यह दृश्य …
उस शाम वो रूख़्सत का समाँ याद रहेगा Us sham vo sukhsat ka sama yaad rahega उस शाम वो रूख़्सत का समाँ याद रहेगा वो शहर वो कूचा वो …
शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती Sham ek gam ki sahar nahi hoti शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती या हमीं को ख़बर नहीं होती हम ने सब दुख जहाँ के …
दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो Dil hiz ke dard se bojhal he ab aan milo to behtar ho दिल हिज्र के …
डूब गया दिन Doob gya din डूब गया दिन जब तक पहुँचे तेरे द्वारे। एक धुँधलका छाया ओर-पास धूप गाँव-बाहर की छूट गई, छप्पर-बैठक सब बिल्कुल उदास पगडंडी …
सब को दिल के दाग़ दिखाए एक तुझी को दिखा न सके Sab ko dil ke daag dikhaye ek tujhi ko dikha na sake सब को दिल के दाग़ …
इस क्षण Is Shan इस क्षण यहाँ शान्त है जल। पेड़ गड़े हैं, घास जड़ी। हवा सामने के खँडहर में मरी पड़ी। नहीं कहीं कोई हलचल। याद तुम्हारी, …
‘इंशा’ जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या Insha ji utho ab kuch karo is shahar me ji ko lagana kya ‘इंशा’ जी उठो …