दाग-धब्बे Daag dhabbe दाग-धब्बे साफ-सुथरी जगहों पर आना चाहते हैं जहाँ कहीं भी कुछ होने को होता है भले ही हत्या होनी हो किसी की दाग-धब्बे प्रकट होने …
यह दिया बुझे नहीं Yah diya bujhe nahi घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो, आज द्वार–द्वार पर यह दिया बुझे नहीं यह निशीथ का दिया ला रहा विहान …
उल्टी गंगा Ulti Ganga एक बनिया था। भला था। भोला था। नीम पागल था। एक छोटी सी दुकान चलाता था, दाल, मुरमुरे, रेवड़ी जैसी चीजें बेचता था और शाम …
छह दिसंबर Chah December इतिहास के बहुत से भ्रमों में से एक यह भी है कि महमूद ग़ज़नवी लौट गया था लौटा नहीं था वह यहीं था सैंकड़ों …
मेरा धन है स्वाधीन क़लम Mera dhan he swadheen kalam राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम मेरा धन है स्वाधीन क़लम जिसने तलवार शिवा को दी …
उदासी कैसी Udasi kesi बहुत समय पहले की बात है। एक जौहरी की दुकान में कई आदमी काम करते थे। जौहरी का कारोबार अच्छा चलता था। दुकान में जगह …
देखता हूँ अँधेरे में अँधेरा Dekhta hu andhere me andhera लाल रोशनी न होने का अँधेरा नीली रोशनी न होने के अँधेरे से अलग होता है इसी तरह …
हिमालय और हम Himalaya aur hum (1) इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही । पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही ।। अंबर में …