स्वतंत्रता का दीपक Swantrata ka deepak घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो, आज द्वार द्वार पर यह दिया बुझे नहीं। यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है …
औकात Aukat वे पत्थरों को पहनाते हैं लंगोट पौधों को चुनरी और घाघरा पहनाते हैं वनों, पर्वतों और आकाश की नग्नता से होकर आक्रांत तरह-तरह से अपनी अश्लीलता …
सुनी सुनाई बात Suni sunai baat बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे जंगल के बीच में एक बहुत बड़ा तालाब था …
गरीब का सलाम ले Garib ka salam le कर्णधार तू बना तो हाथ में लगाम ले क्राँति को सफल बना नसीब का न नाम ले भेद सर उठा रहा …
परसाई जी की बात Parsai ji ki baat पैंतालिस साल पहले, जबलपुर में परसाई जी के पीछे लगभग भागते हुए मैंने सुनाई अपनी कविता और पूछा क्या इस …
सियार और गधा Siyar aur Gadha एक समय की बात है एक गधा एक धोबी के पास रहता था| धोबी उसपर कपडे लाद कर रोज नदी किनारे कपडे धोने …
अपनेपन का मतवाला Apnepan ka matwala अपनेपन का मतवाला था भीड़ों में भी मैं खो न सका चाहे जिस दल में मिल जाऊँ इतना सस्ता मैं हो न सका …
सीढ़ियाँ Sidhiya सीढ़ियाँ चढ़ते हुए जो उतरना भूल जाते हैं वे घर नहीं लौट पाते क्योंकि सीढ़ियाँ कभी ख़त्म नहीं होतीं