मेरा मन Mera man मेरा चंचल मन भी कैसा, पल में खिलता, मुरझा जाता! जब सुखी हुआ सुख से विह्वल, जब दु:खी हुआ दु:ख से बेकल, वह हरसिंगार …
कठपुतली का नाच Kathputli ka nach छत्रपुर के ठाकुर रणवीर सिंह की उदारता और न्याय से सब जनता भली भाँति परिचित थी। उन के दीवान करम चन्द का तो …
सबक Sabak कितनी साफ़ नज़र आती हैं हमारे आगे और पीछे कितनी कितनी राहें हमारे बचपन में जबकि हमारे पाँव और कदम बहुत नन्हें और अबोध होते हैं। तब …
युग और मैं Yug aur me उजड़ रहीं अनगिनत बस्तियाँ, मन, मेरी ही बस्ती क्या! धब्बों से मिट रहे देश जब, तो मेरी ही हस्ती क्या! बरस रहे …
कछुआ और हंस Kachua aur Hans एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसी तलाब में दो हंस तैरने के लिए उतरते थे। हंस बहुत हंसमुख और मिलनसार थे। …
सूरज डूब गया बल्ली भर Suraj dub gya balli bhar सूरज डूब गया बल्ली भर सागर के अथाह जल में। एक बाँस भर उठ आया है चांद, ताड …
माँ के पँख नहीं होते Maa ke pankh nahi hote माँ के पंख नहीं होते कुतर देते हॆं उन्हें होते ही पॆदा खुद उसी के बच्चे । माँ के …
साथी चाँद Sathi chand मैंने देखा, मैं जिधर चला, मेरे सँग सँग चल दिया चाँद! घर लौट चुकी थी थकी साँझ; था भारी मन दुर्बल काया, था ऊब …