प्रयाग Prayag १ मैं बन्दी बन्दी मधुप, और यह गुंजित मम स्नेहानुराग, संगम की गोदी में पोषित शोभित तू शतदल प्रयाग! विधि की बाहें गंगा-यमुना तेरे सुवक्ष पर …
पँख Pankh दरवाजा शायद खुला रह गया है इसी राह से आया होगा उड़कर यह खूबसूरत पंख! खिड़कियां तो सभी बंद हैं। शायद सामने वाले पेड़ पर कोई नया …
जिसका काम उसी को साजे Jiska kam usi ko saje किसी गांव मे एक गरीब घोबी रहता था| धोबी के पास एक गधा था और एक कुत्ता था| …
सुख-दुख Sukh dukh जब तक मन में दुर्बलता है दुख से दुख, सुख से ममता है। पर सदा न रहता जग में सुख रहता सदा न जीवन में …
जैसी तुम्हारी ईछा Jesi Tumhari Iccha मोहिनी को कौन नहीं जानता था, जैसा उसका नाम, वैसे ही उसके करम, मोहिनी अपनी बातों से सदा सबका मन मोह लेती …
पूजना चाहता हूँ किसी अवतार की तरह Pujna chahta hu kisi avtar ki tarha भीड़ भी तो नहीं कह सकता इसे! माना, न ये लाद कर लाए गए हैं …
आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे Aaj ke bichude na jane kab milenge आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे? आज से दो प्रेम योगी, अब वियोगी …
जैसे को तैसा Jese ko tesa नदी के किनारे के जंगल में एक ऊँट रहता था। वह बहुत ही सीधा-साधा था। एक दिन उसकी भेंट एक धूर्त सियार से …