माया Maya दिखाती पहले धूप रूप की , दिखाती फ़िर मट मैली काया! दुहरी झलक दिखा कर अपनी मोह – मुक्त कर देती माया! असम्भाव्य भावी की आशा …
हाथी और चूहा Hathi aur Chuha बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक पेड़ के नीचे कुछ चूहे रहते थे, चूहों ने पेड़ की जड़ के …
अदृश्य होते हुए Adeshya hote hue जानता मैं भी हूं कि लगभग अदृश्य हो रहा हूँ अदृश्य यूँ कौन नहीं हो रहा न वह हवा है, न पानी ही …
हंस माला चल Hans mala chal हंस माला चल, बुलाता है तुझे फिर मानसर शून्य है तेरे लिए मधुमास के नभ की डगर हिम तले जो खो गयी …
ज्ञान की प्यास Kyan ki Pyas उन दिनों महादेव गोविंद रानडे हाई कोर्ट के जज थे। उन्हें भाषाएँ सीखने का बड़ा शौक था। अपने इस शौक के कारण …
आवाज़ आग भी तो हो सकती है Aawaz aag bhi to ho sakti he देखे हैं मैंने तालियों के जंगल और बियाबान भी । बहुत ख़ामोश होते हैं तालियों …
गंगा, बहती हो क्यूँ Ganga bahti ho kyu विस्तार है अपार.. प्रजा दोनो पार.. करे हाहाकार… निशब्द सदा ,ओ गंगा तुम, बहती हो क्यूँ?.. नैतिकता नष्ट हुई, मानवता …
बिना सोचे समझे Bina soche samjhe एक समय शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण कैया जा रहा था। मंदिर में लकडी का काम बहुत …