अपना हाथ जगनाथ Apna Haath Jaganath बुलाकी एक बहुत मेहनती किसान था। कड़कती धूप में उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने रात दिन खेतों में काम …
तू तो है न मेरे पास Tu to he na mere pas सोचता हूँ क्या था कारण माँ को ही नहीं लेने आया सपना या सपने की ही नहीं …
ज्योति पर्व : ज्योति वंदना Jyoti parv jyoti vandana जीवन की अंधियारी रात हो उजारी! धरती पर धरो चरण तिमिर-तम हारी परम व्योमचारी! चरण धरो, दीपंकर, जाए कट …
देखिए, मुझे कोई मुगालता नहीं है Dekhiye, mujhe koi Mugalta nahi सड़कें साउथ-एक्सटेंशन की हों या नोएडा की घूम ही नहीं बैठ भी सकतें हैं जानवर, मसलन गाय, बछड़े, …
मेरे गीत बड़े हरियाले Mere geet bade hariyale मेरे गीत बड़े हरियाले, मैने अपने गीत, सघन वन अन्तराल से खोज निकाले मैँने इन्हे जलधि मे खोजा, जहाँ द्रवित …
ऐसे हैं सुख सपन हमारे Ese he sukh sapan hamare ऐसे हैं सुख सपन हमारे बन बन कर मिट जाते जैसे बालू के घर नदी किनारे ऐसे हैं …
आत्मा की आवाज़ Aatma ki Awaz किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था | ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था|परमात्मा में आस्था रखने वाला था …
दैत्य ने कहा Detya ne kaha दैत्य ने कहा — मैं घोषणा करता हूँ कि आज से सब स्वतंत्र हैं कि सब ले सकते हैं आज से भुनते हुए …