अकेला रह गया Akela rah gya बीते दिसंबर तुम गए लेकर बरस के दिन नए पीछे पुराने साल का जर्जर किला था ढह गया मैं फिर अकेला रह गया …
साँझ-12 Saanjh 12 निमर्म हिम-शैल-शिखर से, जब भी जाकर टकराते। मेरी करूणा के बादल, सब चूर-चूर हो जाते।।१६६।। विक्षुब्ध प्रलय-प्लावन में, आँसू का जलधि विकल हो। पलकों के …
दिन घटेंगे Din ghatenge जनम के सिरजे हुए दुख उम्र बन-बनकर कटेंगे ज़िन्दगी के दिन घटेंगे कुआँ अन्धा बिना पानी घूमती यादें पुरानी प्यास का होना वसन्ती तितलियों से …
साँझ-11 Saanjh 11 खिल उठा मुकुल-दल सुरिमत, छिव अखिल भुवन में छाई। साकार हो गई सहसा, जैसे तरू की तरूणाई।।१५१।। कामिनी-कुंज में खोई, रजनी की सारी माया। तारक …
बहुत दिन के बाद Bahut din ke baad बहुत दिन के बाद देखा है बहुत दिन के बाद आए हो यह तमाशा कहाँ देखा था जो तमाशा तुम दिखाए …
साँझ-10 Saanjh 10 ऊषा के सिमत-गत की, गति से हिल उठीं हिलोरें। किरनों के अनुशासन में, सन गई जलद की कोरें।।१३६।। मेरे प्रसुप्त पौरूष में, तुम प्रकृति बने …
लो वही हुआ Lo vahi hua लो वही हुआ जिसका था ड़र ना रही नदी, ना रही लहर। सूरज की किरन दहाड़ गई गरमी हर देह उघाड़ गई उठ …
साँझ-9 Saanjh 9 नन्हीं-नन्हीं बँूदों से, शीतलता बिखर रही थी। निमर्ल जल से घुल-घुल कर, हिरयाली निखर रही थी।।१२१।। झुक गई दूब की पलकें, आँसू का भार सम्हाले। …