साँझ-5 Saanjh 5 करूणा की गहरी धारा, अभिलाषाआें की आँधी। मैंने पलकों में रोकी, मैंने सासों से बाँधी।।६१।। कोमलता बनी कहानी, मैं निष्ठुरता से हारा। किन शैलों से …
हम देहरी-दरवाज़े ! Hum dehri darvaje राजपाट छोड़कर गए राजे-महाराजे हम उनके कर्ज पर टिके देहरी-दरवाजे चौपड़ ना बिछी पलंग पर मेज़ पर बिछी पैरों पर चाँदनी बिछी सेज …
सरपंच जी ! Sarpanch ji गाँव से लौटे हुए सपने चुरा कर साथ लाए फूल सरसों के! गुल ने पूछा गली की धूल ने पूछा- कहो क्या हाल है? …
साँझ-4 Saanjh 4 उत्सुक नयनों से देखा, सपनों का लिया सहारा। पर मिला नहीं उस छिव का, कोई भी कूल-किनारा।।४६।। कोमल कोमल पंखुरियाँ, लिपटीं थीं भोलेपन से। विह्वल …
प्रश्न यह है Prashan yah he प्रश्न यह है- भरोसा किस पर करें एक नंगी पीठ है सौ चाबुकें बचाने वाले कभी के जा चुके हम डरें भी तो …
साँझ-3 Saanjh 3 किलयों के कर से जैसे, प्याली मरंद की छलकी। मेरे प्राणों में गँूजी, रूनझुन रूनझुन पायल की।।३१।। स्वगंर्ंगा की लहरों में, शशि ने छिप जाना …
भूल गए Bhul gye जाने कैसे हुआ कि प्रिय की पाती पढ़ना भूल गए दायें-बायें की भगदड़ में आगे बढ़ना भूल गए नित फैशन की नये चलन की रोपी …
साँझ-2 Saanjh 2 घन-छाया में सोती हों, ज्यों श्रमित अमा की रातें। वह केश-पाश बेसुध सा, करता समीर से बातें।।१६।। या भूल गये हो निज को, अपनी सीमा …