कुछ क्षणिकाएँ Kuch Kshnikaye दायित्व पंखों में बांधकर पहाड़ उड़ने को कह दिया गया। ध्वजारोहण शौर्य शांति और समृध्दि को काले पहिए से बांधकर बाँस पर लटका दिया गया …
मौसम के कागज़ पर Mausam ke kagaj par मौसम के कागज़ पर आज लिखा था सूरज पर काले मेघ और बारिश ने घेर लिया सुबह-दोपहर-संध्या, सबने यह देखा पर …
नहीं झुकता, झुकाता भी नहीं हूँ Nahi jhukta, jhukta bhi nahi hu नहीं झुकता, झुकाता भी नहीं हूँ जो सच है वो, छिपाता भी नहीं हूँ जहाँ सादर नहीं …
याद एक गुनगुनाती हुई ख़ुशबू की Yaad ek gungunati hui khushbu ki रोज़ रात को तीन बजे एक ट्रेन मेरे दिल पर से गुज़रती है और एक शहर मेरे …
ज्यों डूबे जहाज का पंछी Jyo dube jahaj ka panchi यों तेरी यादों के बादल मन पर घिर आए ज्यों डूबे जहाज़ का पंछी जल पर मण्डराए । एक-स्मृति …
तो तुम्हीं कहो To Tumhi kaho कोई उजली भीगी बदली आकर कन्धे पर झुक जाए तो तुम्हीं कहो वह भीगापन जी लूँ या तन-मन जलने दूँ? मैं प्यास छिपाए …
आत्म-निर्वासन Aatm nirvasan कहाँ से कहाँ तक चलकर कहीं भी न पहुँचने का नाम मेरे लिए यात्रा है और जैसे नींद में चलते रहने का नाम जीवन । रास्ते …
फूटा गीत नया Futa geet naya मन पर घिरा कुहासे वाला मौसम बीत गया इन्द्रधनुष रचती किरणों का फूटा गीत नया । हरसिंगार झरे टहनी-टहनी पंछी चहके जूही, केतकी, …