देह के मस्तूल Deh ke Mastul अंजुरी-जल में प्रणय की अर्चना के फूल डूबे । ये अमलतासी अँधेरे, और कचनारी उजेरे, आयु के ऋतुरंग में सब चाह के अनुकूल …
मुझको भी राधा बना ले नंदलाल Mujhko bhi radha bana le nandlal मुझको भी राधा बना ले नंदलाल हो नंदलाल, रे नंदलाल संग संग चढ़ाऊँगी नंदजी की गैयाँ …
नवरात्री के चौथा से छठा दिन Navratri ke Chothe se Chate din ki Katha व्यक्ति जब अहंकार, क्रोध, वासना और अन्य पशु प्रवृत्ति की बुराई प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त …
संध्या आज प्रसन्न है Sandhya aaj prasann he पहले शिशु के जन्म-दिवस पर शकुर भरी कोई माँ पलना झुलवाए फूली-सी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है पश्चिम के …
शिशुओं के लिए कविताएँ-3 Shishuo ke liye kavitaye 3 कंधे पर बंदूक चढ़ा कर, ज्यों ही चला सिपाही । थर-थर लगा काँपने दुश्मन, शामत आई! शामत आई!! चाचा …
पाटल-पाटल है Patal patal he किसी के स्पर्शों से मेरी देह सब पाटल-पाटल है । प्राण में जली प्रणय की लौ काम्य कौमार्य कपूर हुआ, आरती श्वास, रोम अक्षत …
नवरात्री के पहले तीन दिन कथा Navratri ke pehle teen din ki katha नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए समर्पित किए गए हैं। …
शिशुओं के लिए कविताएँ-2 Shishuo ke liye kavitaye 2 सोचो-समझो और विचारो, पेड़ों को पत्थर मत मारो । समझाता हमको विज्ञान, उनमें भी होती है जान ।। सबसे हँसकर …