प्रेम के लिए जगह Prem ke liye jagah उसने अपने प्रेम के लिए जगह बनाई बुहार कर अलग कर दिया तारों को सूर्य-चन्द्रमा को रख दिया एक तरफ़ …
लोकसभासँ शोकसभा धरि Loksabhas shoksabha dhari महगू बाजल — कते महगी आबि गेल छै! दालि-चाउरमे तँ आगि लागिए गेल छै । कथीसँ डिबीया लेसी मटियाक तेलो उड़नखटोला भ, गेल। …
विजया एकादशी व्रतकथा Vijaya Ekadashi Vrat Katha धर्मराज युधिष्ठिर बोले – हे जनार्दन! फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसकी विधि क्या है? …
शेष Shesh सब-कुछ बीत जाने के बाद बचा रहेगा प्रेम केलि के बाद शैया में पड़ गई सलवटों-सा, मृत्यु के बाद द्रव्य-स्मरण-सा, अश्वारोहियों से रौंदे जाने के बाद …
गंधी बनी अमराई Gandhi bani amrai भाँति-भाँति के इत्र बेचती गन्धी बनी आज अमराई । महुए के रस में घुलते सेमल के फाहे चुनते-चुनते भटक गए भोले चरवाहे । …
आमलकी एकादाशी व्रतकथा Aamlaki Ekadashi Vrat Katha फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। …
वह कैसे कहेगी Vah kese kahegi वह कैसे कहेगी – हाँ! हाँ कहेंगे उसके अनुरक्त नेत्र उसके उदग्र-उत्सुक कुचाग्र उसकी देह की चकित धूप उसके आर्द्र अधर कहेंगे …
चलला गाम बजार Chalalaa Gaam Bajar हम ओ कनहा कुकूर नहि जे बाबू साहेबक फेकल माँड़े पर तिरपित भ’ जाइ । हमर आदर नहि करू जुनि कहू पण्डित, जुनि …