देव प्रबोधिनी एकादशी व्रतकथा Dev Prabodhini Ekadashi Vrat Katha ब्रह्माजी बोले- हे मुनिश्रेष्ठ! अब पापों को हरने वाली पुण्य और मुक्ति देने वाली एकादशी का माहात्म्य सुनिए। पृथ्वी पर …
वह नहीं कहती Vah nahi kahti उसने कहा उसके पास एक छोटा सा हृदय है जैसे धूप कहे उसके पास थोड़ी सी रौशनी है आग कहे उसके पास …
गुमसुम तकै छी Gumsum take chi राति-दिन थर-थर कँपइए पानि हम गुमसुम तकै छी । आइना केर वैह पुरना बानि हम गुमसुम तकै छी । भीत पर उखरल अहाँ …
एक बार जो Ek baar jo एक बार जो ढल जाएंगे शायद ही फिर खिल पाएंगे। फूल शब्द या प्रेम पंख स्वप्न या याद जीवन से जब छूट …
चाँद के चूरे Chand ke Chure बजते हैं तैमूर-तमूरे नए वक़्त के ढहे कँगूरे। पीते मुगली घुट्टी, खाते बिरियानी बाबरनामे की कहाँ-कहाँ से रकबा अपना नक़ल ढूँढ़ते बैनामे की …
वे बच्चे Ve bache प्रार्थना के शब्दों की तरह पवित्र और दीप्त वे बच्चे उठाते हैं अपने हाथ¸ अपनी आंखें¸ अपना नन्हा–सा जीवन उन सबके लिए जो बचाना …
काँटक बन मे Kantak ban me लहुआ लिधुर भेल फूलक सपना काँटक बन मे । टोलक टोल बबूर फुलायल छटपट करइछ आमक पखिना काँटक बन मे । छूटि धनुष …
सड़क पर एक आदमी Sadak par ek aadmi वह जा रहा है सड़क पर एक आदमी अपनी जेब से निकालकर बीड़ी सुलगाता हुआ धूप में– इतिहास के अंधेरे …