मोक्षदा एकादशी व्रतकथा Mokshada Ekadashi Vrat Katha महाराज युधिष्ठिर ने कहा- हे भगवन! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और जगत के पति हैं। मैं आपको …
सुराज ई लियऽ अहाँ Suraj e liya aaha किछु मरल माछ सन सपना दऽ कें तरहथ पर ओ कहलनि हमरा सँऽ सुराज ई लियऽ अहाँ। किछु काँट-कूस किछु अर्थहीन …
समय से अनुरोध Samay se anurodh समय, मुझे सिखाओ कैसे भर जाता है घाव?-पर एक अदृश्य फाँस दुखती रहती है जीवन-भर| समय, मुझे बताओ कैसे जब सब भूल …
पूर्वजों की अस्थियों में Purvajo ki asthiyo me हम अपने पूर्वजों की अस्थियों में रहते हैं- हम उठाते हैं एक शब्द और किसी पिछली शताब्दी का वाक्य-विन्यास विचलित …
जिंदगी Zindagi जिंदगी अभिशाप भी, वरदान भी जिंदगी दुख में पला अरमान भी क़र्ज़ साँसों का चुकाती जा रही जिंदगी है मौत पर अहसान भी वे जिन्हें सर पर …
पद्मा एकादशी व्रतकथा Padma Ekadashi Vrat Katha धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा- हे केशव! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत के करने की विधि क्या है और …
पत्ती Tatti जितना भर हो सकती थी उतना भर हो गई पत्ती उससे अधिक हो पाना उसके बस में न था न ही वृक्ष के बस में जितना …
दीप जकाँ एक नाम Deep jaka ek naam दिन भरि गाछक छाँह जकाँ क्यो संग चलय अभिराम साँझ परैत बरैए मन मे दीप जकाँ एक नाम । बरिसत कहियो …