परम एकादशी व्रतकथा Param Ekadashi Vrat Katha धर्मराज युधिष्ठिर बोले- हे जनार्दन! अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसकी विधि क्या है? कृपा …
जूते Jute जूते वहीं थे उनमें पैर नहीं थे बीच-बीच में उनमें फफूंद लग जाता था क्योंकि कोई पहनता नहीं था निरुपयोग से वे कुछ सख़्त भी पड़ …
पता नहीं Pata nahi पता नहीं सच है कि झूठ पर लोगों का कहना है मेरे प्रेम पगे गीतों को उमर-क़ैद रहना है। ऐसी हवा बही है दिल्ली पटना …
छाता Chata छाते से बाहर ढेर सारी धूप थी छाता-भर धूप सिर पर आने से रुक गई थी तेज़ हवा को छाता अपने-भर रोक पाता था बारिश में …
वट सावित्री व्रतकथा Vat Savitri Vrat Katha सावित्री और सत्यवान की कथा सबसे पहले महाभारत के वनपर्व में मिलती है। जब युधिष्ठिर मारकण्डेय ऋषि से पूछ्ते हैं कि क्या …
जीने-मरने की! Jine marne ki जकरा तन सोनित क लैस नहि तकरा जीने-मरने की! ओकरे बात सुनै अछि पंचो जकरा हाथ गड़ाँस नीक सदा लगलैए सभ कें निम्मल देह …
ऋतुराज इक पल का Rituraj ik pal ka राजमिस्त्री से हुई क्या चूक, गारे में बीज को संबल मिला रजकण तथा जल का। तोड़कर पहरे कड़े पाबंदियों के आज …
टोकनी Tokani यकायक पता चला कि टोकनी नहीं है पहले होती थी जिसमें कई दुख और हरी-भरी सब्ज़ियाँ रखा करते थे अब नहीं है… दुख रखने की जगहें …