शिवरात्रि व्रतकथा Shivratri Vrat Katha पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, …
कोहबर Kohbar पुरइन दह सन सीतल कोहबर चानन लागल केबार हे! ताहि पैसि सुतलाह दुलहा रघुबर दुलहा संग सुतलि सुकुमारि हे! नव रंग पटिया, नवहि रंग निनिया चारू दिसि …
चल उठ नेता Chal uth neta चल उठ नेता तू छेड़ तान! क्या राष्ट्रधर्म? क्या संविधान? तू नए-नए हथकंडे ला! वश में अपने कुछ गुंडे ला! फ़िर ऊँचे-ऊँचे …
शरद पूर्णिमा व्रतकथा Shrad Purnima Vrat Katha आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला त्यौहार शरद पूर्णिमा की कथा कुछ इस प्रकार से है- एक साहूकार के दो …
हर लेती हैं बेटियाँ Har leti he betiya सहती रहती रात-दिन, तरह-तरह के तीर हर लेती हैं बेटियाँ, घर-आँगन की पीर । सौदागर इस देश के, रहते मद …
जाड़े में पहाड़ (नवगीत) Jade me pahad, Navgeet फिर हिमालय की अटारी पर उतर आए हैं परेबा मेघ हंस जैसे श्वेत भींगे पंखवाले । दूर पर्वत पार से मुझको …
श्रावण सोमवार व्रतकथा Shravan Somvar Vrat Katha श्रावण सोमवार की कथा के अनुसार अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर …
चानन गाछ बनल छी Chanan gach banan chi चारू कात बसैए विषधर पोरे-पोर डसल छी एहि बिखाह जंगल मे हमही चानन गाछ बनल छी । खेत पथार धान उपटा …