वो घर भी कोई घर है जहाँ बच्चियाँ न हों Vo ghar bhi koi ghar he jaha bachiya na ho वो शाख़ है न फूल, अगर तितलियाँ न हों …
शुक्रवार व्रतकथा Shukravar Vrat Katha शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है, जिसकी कथा इस प्रकार से है- एक बुढिय़ा थी, उसके सात बेटे थे. 6 …
रेत झरझर Ret Jharjhar रेत झरझर बह रही है नदी महमह कर रही है धार पुलकित धाह देती फूटने को आकुल है किया जो तनिक-सा स्पर्श रोमछिद्र धधक …
रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए Raat aankho me dhaki palko pe junu aaye रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए हम हवाओं की तरह जाके …
कुछ तो मजबूरियाँ रही होगी Kuch to majburiya rahi hongi कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता। तुम मेरी ज़िन्दगी हो, ये सच है, ज़िन्दगी का …
पाथेय Pathey आओ बैठो साथ पिया बालू के कण हैं अपने ही । नहीं यहाँ दुनिया का चक्कर पलकों में पग धर आओ री यह है रेत नदी …
घुरफेकन लोहार Ghurfekan lohar अपने कंघे पर टँगारी को लादे जाता घुरफेकन लोहार हमारे लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण नागरिक है जब वह चलता हैं हमारे लोकतंत्र का सबसे …
रात के साथ रात लेटी थी Raat ke saath raat leti thi रात के साथ रात लेटी थी सुबह एक पालने में रोती थी याद की बर्फपोश टहनी पर …