गुरुवार व्रतकथा Guruvar Vrat Katha प्राचीन समय की बात है. किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी तथा दानी राजा राज्य करता था. वह प्रत्येक गुरूवार को व्रत रखता एवं …
दुपट्टा Dupatta दुपट्टा लहरा रहा है शानदार हवा चल रही है तेज़ बादल बरसने को हैं मौसम रहा है लगातार बदल तय करना कठिन है दुपट्टा क्यों लहरा …
तेरा हाथ मेरे काँधे Tera haath mere kandhe तेरा हाथ मेरे काँधे पे दर्या बहता जाता है कितनी खामोशी से दुख का मौसम गुजरा जाता है नीम पे अटके …
अर्ध्य Adhrya चांद निकल आया यही तो कहा था उस रात जब माध की चौथ को तुम अर्ध्य दे रही थी तुम्हारे लिये चांद का यह निकलना पुतलियों …
बुधवार व्रतकथा Budhvar Vrat Katha एक समय किसी नगर में एक बहुत ही धनवान साहुकार रहता था. साहुकार का विवाह नगर की सुन्दर और गुणवंती लड़की से हुआ था. …
साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं Sath chalte aa rahe he pas aa sakte nahi साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी …
रेत में शाम Ret me sham चल पड़ी नाव धीरे-धीरे फिर संध्या आई नदी नाव संयोग हुआ अब मन में बालू की आकृतियाँ छाई टूटा तारा टूटी लहरें …
चंद शेर Chand sher उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये । ज़िन्दगी तूने मुझे कब्र से कम …