एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती Ek stri ghar se nikarte hue bhi nahi nikalti एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती वह …
वो महकती पलकों की ओट Vo mahakti palako ki Oat वो महकती पलकों की ओट से कोई तारा चमका था रात में मेरी बंद मुठ्ठी ना खोलिये वही कोहीनूर …
रविवार व्रत कथा Ravivar Vrat Katha सभी मनोकामनाएं पूर्ण करनेवाले और जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा हेतु सर्वश्रेष्ठ व्रत रविवार की कथा इस प्रकार से है- …
किसान Kisan न उसका कोई रूप है न उसकी कोई जाति न उसका कोई घर है न उसकी कोई पाति आकाश उसकी छत है मौसम उसका आभूषण हत्या …
वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे Vo Gazal valo ka uslub samajhte honge वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे इतनी …
बच्चा और ईश्वर Baccha aur ishwar बाबू, चलो ना बको मत, चलो ना कहता है एक बच्चा अपने पचास वर्षीय अधेड़ पिता की अंगुलियों को थामें बच्चा बार-बार …
वही ताज है वही तख़्त है Vahi taj he vahi takhat he वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है ये वही ख़ुदा की ज़मीन …
मरे हुए लोग Mare hue log मरे हए लोगों के इस शहर में हर आदमी अपने पुर्नजन्म को लेकर परेशान है मरे हुए लोग मरे हुए लोगों में …