वह परवाज़ Vah Parvaz रामभरोसे आज नदी चढ़ी है सागर गहरा पार उसे ही करना सोच रहा वह नैया छोटी और धार पर तिरना छोटे-छोटे चप्पू मेरे साहस-धीरज-लाज …
खून अपना हो या पराया हो Khun apna ho ya paraya ho ख़ून अपना हो या पराया हो नस्ले-आदम का ख़ून है आख़िर जंग मग़रिब में हो कि मशरिक …
चुप बैठा धुनिया Chup Betha dhuniya चुप बैठा धुनिया भीड़-भाड़ वह चहल पहल वह बन्द द्वार का एक महल वह ढोल मढ़ी-सी लगती दुनिया मेहनत के मुँह बँध …
परछाइयाँ Parchaiya जवान रात के सीने पे दूधिया आँचल मचल रहा है किसी ख्वाबे-मरमरीं की तरह हसीन फूल, हसीं पत्तियाँ, हसीं शाखें लचक रही हैं किसी जिस्मे-नाज़नीं की …
फगुआ- ढोल बजा दे Phagua dhol baja de जीवन की आज अबीर लगा दे फगुआ- ढोल बजा दे तेज हुआ रवि भागी ठिठुरन शीत-उष्ण-सी ऋतु की चितवन अकड़ …
असहिष्णुता Asahishnuta असहिष्णुता वो स्थिति हैं जो किसी दूसरे धर्म, समुदाय के लोगों के विचारों, विश्वासों, मान्यताओं और प्रथाओं को मानने से इंकार करती हैं। समाज में बढ़ती …
चिड़िया और चिरौटे Chidiya aur chirote क्या बदला है गौरैया रूठ गई भाँप रहे बदले मौसम को चिड़िया और चिरौटे झाँक रहे रोशनदानों से कभी गेट पर बैठे …
शाहकार Shankar मुसव्विर मैं तेरा शाहकार वापस करने आया हूं अब इन रंगीन रुख़सारों में थोड़ी ज़िदर्यां भर दे हिजाब आलूद नज़रों में ज़रा बेबाकियां भर दे लबों की …