कवि कुछ रचो नवीन Kavi kuch racho navin कवि कुछ रचो नवीन, वीन झंकृत हो मन की। कल की जड़ीभूत उपमायें विम्ब पुरातन वही कथायें पात ढाक के …
गोपिन के अधरान की भाषा Gopin ke adran ki bhasha ये अनुराग के रंग रंगी, रसखान खरी रसखान की भाषा। यामैं घुरी मिसुरी मधुरी, यह गोपिन के अधरान की …
एक प्रवासी Ek Pravasi लौट! घर चल मुसाफ़िर कहाँ अब आसरा परदेश में है यहाँ छल का चलन हर वेश में है नेह के नीर आँखों में नहीं …
प्रयाण-गीत Prayan geet प्रयाण-गीत गाए जा! तू स्वर में स्वर मिलाए जा! ये जिन्दगी का राग है–जवान जोश खाए जा प्रयाण-गीत … तू कौम का सपूत है! स्वतन्त्रता का …
मेरे मित्र मेरे एकान्त Mere mitra mere ekant मेरे मित्र मेरे एकान्त सस्मित और शान्त कितने सदय हो सुनते हो मन की टोका नहीं कभी रोका भी नहीं …
हिन्दुस्तान हमारा है Hindustan hamara hai कोटि-कोटि कंठों से गूजा प्यारा कौमी नारा है हिन्दुस्तान हमारा है। हिन्दुस्तान हमारा है॥ मन्दिर और मीनार हमारे गाँव, शहर, बाजार हमारे। चन्दा-सूरज, …
धनाक्षरी Dhanakshari भंग की तरंग में अनंगनाथ झूम रहे, फागुनी बयार से जटा भी छितराई है। गंग की तरंग भी उमंग में कुरंगिनी सी, शैलजेश की जटाटवी को …
सीखा पशुओं से Sikha pashuo se कुत्ते से सीखी चापलूसी मलाई चट करना बता गई पूसी बकरे से अहं ब्रह्मास्मि-मैं-मैं कहां तक जानवरों को धन्यवाद दें! बैलों से सीखा …