आज भी वहीं खड़ा उद्दीप्त Aaj bhi vahi khada adipt आज भी वहीं खड़ा उद्दीप्त विश्वधारा में मैं निरुपाय खोजता हूँ बस एक आलम्ब यजन करने का तुच्छ …
नए युग के सौदागर Naye yug ke Sodagar ये पहाड़ों की ढलान से आहिस्ता-आहिस्ता उतरनेवाले तराई के रास्ते पाँव-पैदल चल कर आनेवाले पुराने व्यापारी नहीं हैं ये इमली के …
अपौरुषेय Aposurushey शब्द स्वयं चुनते हैं, अपनी राह बैसाखियों पर टिके शब्द हो जाते हैं धराशायी बैसाखियों के टूटते ही| बहुत पाले और संवारे हुये शब्द भी गल …
सलवा जुडूम Salva judum हमने हत्या को साँस्कृतिक अनुष्ठान में बदल दिया है कोई नहीं कह सकता इसे सत्ता का दमन सरकारी उत्पीड़न अब कन्धे भी तुम्हारे हैं छातियाँ …
जी को जी भर रो लेने दो Ji ko ji bhar ro lene do जी को जी भर रो लेने दो आँखों को जल बो लेने दो किसी …
अपना ही देश Apna hi desh हमारे पास नहीं है कोई पटकथा हम खाली हाथ ही नहीं लगभग खाली दिमाग़ आए हैं मंच पर विचार इस तरह तिरोहित है …
छिपना Chipana मुखौटों से झाइयाँ नहीं छिपतीं पूरा का पूरा चेहरा छिप जाता है सबको पता चल जाता है कि सब कुछ छिपा दिया गया है भला ऐसे छिपने-छिपाने …
संकट Sankat अक्सर ताला उसकी ज़बान पर लगा होता है जो बहुत ज़्यादा सोचता है जो बहुत बोलता है उसके दिमाग पर ताला लगा होता है संकट तब बढ़ …