Tag: Hindi Poems
क्या कहे सुलेखा ! Kya kahe sulekha क्या कहे सुलेखा खनन माफ़िया मिल कर लूटे बाझ, कबूतर पर ज्यों टूटे मेट रहे कुदरत का लेखा छविया भोली धरा-दबोचा …
नज़रे-कालिज Nazare kalij ऐ सरज़मीन-ए-पाक़ के यारां-ए-नेक नाम बा-सद-खलूस शायर-ए-आवारा का सलाम ऐ वादी-ए-जमील मेंरे दिल की धडकनें आदाब कह रही हैं तेरी बारगाह में तू आज भी है …
अनुभव के मोती Anubhav ke moti इस धरती के अम्बर में फहराएँ मेघा बन कर जीवन जल दें सागर-सा लहराएँ टूटे-फूटे बासन घर के अपनी व्यथा सुनाते सभी …
शिकस्त Shikast अपने सीने से लगाये हुये उम्मीद की लाश मुद्दतों ज़ीस्त1 को नाशाद2 किया है मैनें तूने तो एक ही सदमे से किया था दो चार दिल को …
मन का तोता Men ka tota करता रहता नित्य नए संवाद महल-मलीदा, पदवी चाहे लाखों-लाख पगार काम न धेले भर का करता सपने आँख हज़ार इच्छाओं की सूची …
नाकामी Nakami मैने हरचन्द गमे-इश्क को खोना चाहा, गमे-उल्फ़त गमे-दुनिया मे समोना चाहा! वही अफ़साने मेरी सिम्त रवां हैं अब तक, वही शोले मेरे सीने में निहां हैं अब …
पंच गाँव का Panch Ganv ka झूम चाल है लगते कुछ बेढंगे इज्जत इनसे दूर कि इनकी जेबों में हैं दंगे दबंगई की दाढ़ लगी है कैसी आदमखोरी …
तेरी आवाज़ Teri Awaz रात सुनसान थी, बोझल थी फज़ा की साँसें रूह पे छाये थे बेनाम ग़मों के साए दिल को ये ज़िद थी कि तू आए तसल्ली …