Tag: Hindi Poems
तुम कागज पर लिखते हो Tum kagaz par likhte ho वह सड़क झाड़ता है तुम व्यापारी वह धरती में बीज गाड़ता है । एक आदमी घड़ी बनाता एक …
ज्ञानीजन Gyanijan ज्ञान के आतंक में मेरे घर का अन्धेरा बाहर निकलने से डरता है ज्ञानीजन हँसते हैं बन्द खिड़कियाँ देखकर उधड़े पलस्तर पर बने अकारण भुतैले चेहरों पर …
उठो Utho चुप मसान में बैठे-बैठे दुःख सोचना, दर्द सोचना! शक्तिहीन कमज़ोर तुच्छ को हाज़िर नाज़िर रखकर सपने बुरे देखना! टूटी हुई बीन को लिपटाकर छाती से राग …
सेवाग्राम Sevagram कई तरह के समय थे वे लोग सबके दस्तावेज तैयार करने में लगे थे कुछ ही पढ़े जाने थे मेरे समय में दूसरों के समय ने प्राणघातक …
घर की याद Ghar ki yaad बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, अब सवेरा हो गया है, कब सवेरा …
परिसर Parisar जंगली फूलों ने लॉन के फूलों से पूछा, बताओ क्या दुःख है क्यों सूखे जा रहे हो दिन प्रतिदिन मरे जा रहे हो!! पीले, लाल, जामुनी, सफेद, …
आषाढ़ का पहला दिन Ashadh ka pahla din कहीं गरजन का जाकर दूर सिर के पास फिर पड़ना उमड़ती नदी का खेती की छाती तक लहर उठना ध्वजा …
जब हम नहीं रहेंगे Jab Hum nahi rahenge सड़क का कर्ज था शिरीषों पर निर्जन पगडंडी के बजाए साफ-सुथरा रास्ता सब के लिए और लो, जो तुम बीच में …