Tag: Hindi Poems
वाणी की दीनता Vani ki Dinta अपनी मैं चीन्हता! कहने में अर्थ नहीं कहना पर व्यर्थ नहीं मिलती है कहने में एक तल्लीनता! आस पास भूलता हूँ जग …
शरीर Shareer सारे रहस्य का उद्घाटन हो चुका और तुम में अब भी उतनी ही तीव्र वेदना है आनंद के अंतिम उत्कर्ष की खोज के समय की वेदना असफल …
बेदर्द Bedard मन को मानो सूखने के ख़याल से रस्सी पर डाल दिया है और मन सूख रहा है बचा-खुचा दर्द जब उड़ जाएगा तब फिर पहन लूँगा …
लहर Lahar द्वार के भीतर द्वार द्वार और द्वार और सबके अंत में एक नन्हीं मछली जिसे हवा की ज़रूरत है प्रत्येक द्वार में अकेलापन भरा है प्रत्येक द्वार …
आराम से भाई ज़िन्दगी Aram se bhai zindagi ज़रा आराम से तेज़ी तुम्हारे प्यार की बर्दाशत नहीं होती अब इतना कसकर किया आलिंगन ज़रा ज़्यादा है जर्जर इस …
फलक Falak खेत को देखना किसी बड़े कलाकार के चित्र को देखने जैसा है विशाल काली पृष्ठभूमि जिस पर हरी धारियाँ मानो सावन में धरती ने ओढ़ा हो लहरिया …
अच्छा अनुभव Acha Anubhav मृत्यु का सुवास देह पर उस का स्पर्श मधुर ही कहूँगा उस का स्वर कानों में भीतर मगर प्राणों में जीवन की लय तरंगित …
लौटना Lotna जीवन के अंतिम दशक में कोई क्यों नहीं लौटना चाहेगा परिचित लोगों की परिचित धरती पर निराशा और थकान ने कहा जो कुछ इस समय सहजता से …