Tag: Hindi Poems
बदलते सन्दर्भ Badalte Sandarbh सारा संदर्भ बदल जाता है । इस कोने के फूलदान को ज़रा उस कोने कीजिए, इस आले के दर्पण को उस आले, या इस मेज़ …
तुकों के खेल Turko ke khel तुकों के खेल जैसे भाषा के ऊंट की नाक में नकेल! इससे कुछ तो बनता है भाषा के ऊंट का सिर जितना …
ये शहर आफ़तों से तो ख़ाली कोई न था Ye shahar Afato se to khali koi na tha जब हम सख़ी हुए तो सवाली कोई न था लिक्खा है …
भाईचारा Bhaichara दोनों मूरख, दोनों अक्खड़, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, एक साथ एक बाट से लौटे। बात बात में बात ठन गई, बांह उठी और मूछ …
न देखें तो सुकूँ मिलता नहीं है Na Dekhe to suku milta nahi he हमें आख़िर वो क्यूँ मिलता नहीं है मोहब्बत के लिए जज़्बा है लाज़िम ये आईना …
हम सब गाएँ Hum sab gye अकेले में या मेले में हम सब गुनगुनाते रहें क्योंकि गुनगुनाते रहे हैं भौंरे गुनगुना रही हैं मधुमक्खियाँ नीम के फूलों को चूसने …
अजीब सुब्ह थी दीवार ओ दर कुछ और से थे Ajeeb subah thi divar o dar kuch aur se the निगाह देख रही थी कि घर कुछ और से …
पंडित सरबेसर Pandit Sabesar सारे मूंह पर केसर थोपी सरबेसर तब चले बज़ार लड़के पीछे लगे हज़ार| पंडित जी ने मौका देखा कहा, दिखाओ हाथ की रेखा पास-फेल …