Tag: Hindi Poems
अजब यक़ीन उस शख़्स के गुमान में था Ajab yakeen us shakhsh ke guman me tha वो बात करते हुए भी नई उड़ान में था हवा भरी हुई फिरती …
महंगे–सस्ते Mahange saste पांच ब्राहान न्योते तब अरसराम, परसराम तुलसी, गंगा, सालगराम! अरसराम खाएँ अरसे तक परसराम खाएँ परसे तक तुलसी, तुलसीदल पर रहे गंगा, गंगाजल पर रहे! …
हमारा डूबना मुश्किल नहीं था Hamara Dubna mushkil nahi tha नज़र में दूर तक साहिल नहीं था कहाँ था गुफ़्तुगू करते हुए वो वो था भी तो सर-ए-महफ़िल नहीं …
धरती पर तारे Dharti par tare सारे के सारे आसमान के तारे टूट पड़े धरती के ऊपर झर-झर-झर-झर अगर तो बतलाओ क्या होगा? धरती पर आकाश बिछेगा किरणों …
यक़ीं से जो गुमाँ का फ़ासला है Yaki se jo guma ka fasala he ज़मीं से आसमाँ का फ़ासला है हवा-पैमाई की ख़्वाहिश है इतनी कि जितना बादबाँ का …
कवि Kavi और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध यह कि तेरी-भर न हो तो कह, और बहते बने सादे ढंग से तो बह. जिस तरह हम …
कब खुलेगा कि फ़लक पार से आगे क्या है Kab Khulega ki Falak paar se aage kya he किस को मालूम कि दीवार से आगे क्या है एक तुर्रा …
पश्चाताप Pashchatap सूने में से चुन लाया क्या करते तुम अकेले झेलते झमेले हवा के थोड़ी देर हिलते डुलते उसके इशारों पर और शायद फिर बिखर जाते यों …