Tag: Hindi Poems
परम्परा का अनुकरण Parampara ka anukaran परम्परा का अनुकरण या अनुकरण की परम्परा। भीड़ चारों ओर चिल्ल-पों और शोर। भीड़, भीड़ों से घिरी, भीड़, भीड़ों में गुथी, भीड़ …
जहाँ जाकर खत्म होती हैं दिशायें Jaha jakar khatam hoti hai dishaye जहाँ जाकर खत्म होती हैं दिशायें, क्या वहाँ दीवार होगी? क्या नहीं दीवार के उस पार …
फर्क़ आदमी और जानवर में Farak aadmi aur janvar me आदमी और रीछ में क्या अंतर है? आदमी की हज़ामत बनती है, रीछ की नहीं। आदमी और हाथी में …
चक्की Chakki चक्की, टनों गेहूँ चबानें के बाद भी, मोटी नहीं होती, बल्कि, घिस जाते हैं दाँत ही उसके। मोटा होता है, उसके पीसे पर जलन काटनें वाला …
व्यंग्य कोई कांटा नहीं Vyan koi kanta nahi व्यंग्य कोई कांटा नहीं- फूल के चुभो दूं , कलम कोई नश्तर नहीं- खून में डूबो दूं दिल कोई कागज नहीं- …
दीपावली Dipavali जागी श्याम-विभावरी शुभकरी, दीपांकिता वस्त्रिता कल्माशांतक ज्योति शुभ्र बिखरी, आलोकिता है निशा ज्योतिष्मान स्वयं प्रतीचिपट से, सन्देश देता गया दीपों की अवली प्रदीप्त कर दे, संपूर्ण …
प्रेम-युद्ध Prem Yudh अपनी चरम अवस्था में युद्ध ही होता है प्रेम एक ऐसी जंग जिसमे स्त्री जीत कर भी पराजय के गहरे अहसास में डूब जाती है और …
जीवन दर्शन Jeevan darshan व्याप्त हो तुम यों सृजन में नीर जैसे ओस कन में हे! अलक्षित। तुम्हे जीवन में, मरण में शून्य में वातावरण में पर्वतों में …