Tag: Hindi Poems
अपौरुषेय Aposurushey शब्द स्वयं चुनते हैं, अपनी राह बैसाखियों पर टिके शब्द हो जाते हैं धराशायी बैसाखियों के टूटते ही| बहुत पाले और संवारे हुये शब्द भी गल …
सलवा जुडूम Salva judum हमने हत्या को साँस्कृतिक अनुष्ठान में बदल दिया है कोई नहीं कह सकता इसे सत्ता का दमन सरकारी उत्पीड़न अब कन्धे भी तुम्हारे हैं छातियाँ …
जी को जी भर रो लेने दो Ji ko ji bhar ro lene do जी को जी भर रो लेने दो आँखों को जल बो लेने दो किसी …
अपना ही देश Apna hi desh हमारे पास नहीं है कोई पटकथा हम खाली हाथ ही नहीं लगभग खाली दिमाग़ आए हैं मंच पर विचार इस तरह तिरोहित है …
छिपना Chipana मुखौटों से झाइयाँ नहीं छिपतीं पूरा का पूरा चेहरा छिप जाता है सबको पता चल जाता है कि सब कुछ छिपा दिया गया है भला ऐसे छिपने-छिपाने …
संकट Sankat अक्सर ताला उसकी ज़बान पर लगा होता है जो बहुत ज़्यादा सोचता है जो बहुत बोलता है उसके दिमाग पर ताला लगा होता है संकट तब बढ़ …
कच्चा kacha मिट्टी में मिल जाता है जो खिच्चा और कच्चा है पकने पर तो मिट्टी भी मिट्टी में नहीं मिलती
कभी – कभी जो नीति हमें चलना Kabhi – kabhi jo niti hame chalna कभी – कभी जो नीति हमें चलना सिखलाती है। कभी वही हमको इच्छित पथ …