Tag: Hindi Poems
कमरे में धूप Kamre me dhoop हवा और दरवाज़ों में बहस होती रही, दीवारें सुनती रहीं। धूप चुपचाप एक कुरसी पर बैठी किरणों के ऊन का स्वेटर बुनती रही। …
कविता का वह काल पुरुष Kavita ka vah kal purush गरल पिया जीवन भर जिसने, अमृत का रखवाला। कविता का वह काल पुरुष, था जिसका नाम निराला । …
जिस समय में Jis samay me जिस समय में सब कुछ इतनी तेजी से बदल रहा है वही समय मेरी प्रतीक्षा में न जाने कब से ठहरा हुआ है! …
कब किसी ने प्यार चाहा Kab kisi ne pyar chaha कब किसी ने प्यार चाहा आवरण में प्यार के, बस, देह का व्यापार चाहा प्रेम अपने ही स्वरस …
घंटी Ghanti फ़ोन की घंटी बजी मैंने कहा- मैं नहीं हूँ और करवट बदल कर सो गया दरवाज़े की घंटी बजी मैंने कहा- मैं नहीं हूँ और करवट बदल …
एक भूल ऐसी जो मेरे जीवन का Ek bhul esi jo mere jeevan ka एक भूल ऐसी जो मेरे जीवन का शृंगार हो गयी। भव-जलनिधि में भटकी नौका …
दीवारें Diware अब मैं एक छोटे-से घर और बहुत बड़ी दुनिया में रहता हूँ कभी मैं एक बहुत बड़े घर और छोटी-सी दुनिया में रहता था कम दीवारों से …
इतना कुछ था Itna kuch tha इतना कुछ था दुनिया में लड़ने झगड़ने को पर ऐसा मन मिला कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा और जीवन बीत गया