Tag: Hindi Poems
कैसी हवा चली उपवन में सहसा कली-कली मुरझाई Kese hava chali upvan me sahsa kali-kali murjhai कैसी हवा चली उपवन में सहसा कली-कली मुरझाई। ईश्वर नें निश्वास किया …
सृजन के क्षण Srijan ke kshan रात मीठी चांदनी है, मौन की चादर तनी है, एक चेहरा? या कटोरा सोम मेरे हाथ में दो नयन? या नखतवाले व्योरम मेरे …
स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं कुछ उजले कुछ धुंधले-धुंधले Smriti k eve chinha ubharte hai kuch ujale kuch dhundhle-dhundhle स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं कुछ उजले …
ऐतिहासिक फ़ासले Etihasik fasle अच्छी तरह याद है तब तेरह दिन लगे थे ट्रेन से साइबेरिया के मैदानों को पार करके मास्को से बाइजिंग तक पहुँचने में। अब केवल …
रात्रि के अंन्तिम प्रहर तक तुम न मुझसे दूर जाना Ratri ke antim prahar tak tum na mujhse door jana रात्रि के अंन्तिम प्रहर तक तुम न मुझसे …
रोते-हँसते Rote hanste जैसे बेबात हँसी आ जाती है हँसते चेहरों को देख कर जैसे अनायास आँसू आ जाते हैं रोते चेहरों को देख कर हँसी और रोने के …
अहम की ओढ़ कर चादर Aham ki odh kar chadar अहम की ओढ़ कर चादर फिरा करते हैं हम अक्सर अहम अहमों से टकराते बिखरते चूर होते हैं …
एक चीनी कवि-मित्र द्वारा बनाए अपने एक रेखाचित्र को सोचते हुए Ek chini kavi-mitra dwara banaye apne ek rekhachitra ko sochte hue यह मेरे एक चीनी कवि-मित्र का झटपट …