Tag: Hindi Poems
चल इंशा अपने गाँव में Chal insha apne gaun me यहाँ उजले उजले रूप बहुत पर असली कम, बहरूप बहुत इस पेड़ के नीचे क्या रुकना जहाँ साये कम, …
जस का तस Jas ka tas शाख़-शाख़ बुलबुल लिखती है पत्ता-पत्ता गुल लिखती है । बेटी माँ से जो पढ़ती है बच्चों में वो कुल लिखती है । …
जल्वा-नुमाई बेपरवाई हाँ यही रीत जहाँ की है Jalva numai beparvai ha yahi reet jaha ki he जल्वा-नुमाई बेपरवाई हाँ यही रीत जहाँ की है कब कोई लड़की मन …
दृश्य घाटी में Drishya ghati me बीत गए दिन फूल खिलने के। होती हैं केवल वनस्पतियाँ हरी-हरी-सी हर गली हर मोड़ पर बैठी मौत अपनी बाँह फैलाकर। बर्फ़-सा …
फ़क़ीर बन कर तुम उनके दर पर हज़ार धुनि रमा के बैठो Fakeer ban kar tum unke dar par hazar dhuni rma ke betho फ़क़ीर बन कर तुम उनके …
यात्रा के बाद भी Yatra ke baad bhi यात्रा के बाद भी पथ साथ रहते हैं। हमारे साथ रहते हैं। खेत खम्भे-तार सहसा टूट जाते हैं, हमारे साथ …
सुनते हैं फिर छुप छुप उन के घर में आते जाते हो Sunte he fir chup chup un ke ghar me aate jate ho सुनते हैं फिर छुप छुप …
घर नियराया Ghar niyraya जैसे-जैसे घर नियराया। बाहर बापू बैठे दीखे लिए उम्र की बोझिल घड़ियाँ। भीतर अम्माँ रोटी करतीं लेकिन जलती नहीं लकड़ियाँ। कैसा है यह दृश्य …