Tag: Hindi Poems
चाँद ज़रा धीरे उगना Chand zara dhire ugna चाँद, जरा धीरे उगना । गोरा-गोरा रूप मेरा। झलके न चाँदनी में चाँद, जरा धीरे उगना । भूल आई हँसिया मैं …
मुझे चाहिए Mujhe chahiye मुझे चाहिए पूरी पृथ्वी अपनी वनस्पतियों, समुद्रों और लोगों से घिरी हुई, एक छोटा-सा घर काफ़ी नहीं है। एक खिड़की से मेरा काम नहीं …
रामे जकाँ Rame jaka गाम अपनो लगय आन गामे जकाँ तैं फिरै छी बने-बोन रामे जकाँ। ओ जे सरिसोक हरदी रड.ल खेत छल आर सपना जे भोरक ओ समवेत …
एक खिड़की Ek khidki मौसम बदले, न बदले हमें उम्मीद की कम से कम एक खिड़की तो खुली रखनी चाहिए। शायद कोई गृहिणी वसंती रेशम में लिपटी उस …
चरते बादल Charte badal भरे हुए को भरते बादल सोचो, यह क्या करते बादल । उनके खेत बरसते केवल उनसे भी क्या डरते बादल । किस नदिया के आमन्त्रण …
करेह धार Kareh dhar गाम अनचिन्हार भेल, लोक अनचिन्हार चिनहै अछि मुदा आइ धरि करेह-धार ।। वैह तप्पत बाउल आर वैह कंचन पानि डेगे-डेगे लैए गोड़ दुनू छानि चिरै-चुनमुनी …
विश्वास करना चाहता हूँ Vishvas karna chanta hu विश्वास करना चाहता हूँ कि जब प्रेम में अपनी पराजय पर कविता के निपट एकांत में विलाप करता हूँ तो …
जी भर गाओ Jee bhar gao मुझ पर प्यारे शोध करो मत मुझको जी भर गाओ । चीर-फाड़ कविता के तन की अच्छी बात नहीं ख़ून-पसीने की फ़सलें मिलतीं …