Tag: Hindi Poems
कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ Kuch to me bhi bahut dil ka kamjor hu कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ कुछ मुहब्बत …
शीश-मौर बाँधने लगा फागुन Shish-mor bandne laga phagun आमों के शीश- मौर बाँधने लगा फागुन । शून्य की शिलाओं से- टकराकर ऊब गई, रंगहीन चाह नए रंगों में …
कोई काँटा चुभा नहीं होता Koi kanta chubha nahi hota कोई काँटा चुभा नहीं होता दिल अगर फूल सा नहीं होता कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँ कोई बेवफ़ा …
जीकर देख लिया Jikar dekh liya जीकर देख लिया जीने में कितना मरना पड़ता है अपनी शर्तों पर जीने की एक चाह सबमें रहती है किन्तु ज़िन्दगी अनुबंधों …
किस ने मुझ को सदा दी बता कौन है Kis ne mujh ko sada di bata kaun he किस ने मुझको सदा दी बता कौन है ऐ हवा तेरे …
नदी का बहना मुझमें हो Nadi ka bahna mujhme ho मेरी कोशिश है कि- नदी का बहना मुझमें हो। तट से सटे कछार घने हों, जगह-जगह पर घाट …
ख़्वाब इन आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये Khwab in aankho se ab koi chura kar le jaye ख़्वाब इस आँखों से अब कोई चुरा कर ले …
दूधिया चाँदनी फिर आई Dudhiya chandni fir aai दूधिया चाँदनी फिर आई । मेरी पिछली यात्राओं के कुछ भूले चित्र- उठा लाई । मैं मुड़ा अनेक घुमावों पर, …