Tag: Hindi Poems
पूरे हुए पचास-वर्ष Pure hue pachas varsh आज़ादी की पचासवीं सालगिरह पर एक कविता नाश्ते के लिए भुनी हुई स्त्री का गोश्त लाया जाए हाथ धोने के लिए अगवा …
विजयकांत Vijaykant पहाड़ी झरने की तरह चट्टानों से टकराते पहले-पहल मिले थे विजयकांत विजयकांत नद की तरह बहे तब से अब तक समुद्र होने की प्रक्रिया में ज्वारग्रस्त होते …
अन्धेरे के बाहर एक निगाह Andhere ke bahar ek nigah अन्धेरे के बाहर एक निगाह है देखती हुई अन्धेरे और एकान्त के सारे दृश्य भावनाओं के खेल में पराजित …
सज़ा Saza तमाशा बनने की तैयारी ख़त्म हुई तमाशा बन गया है अब एक पूरा का पूरा आदमी | नाराज़ लोग ख़ुश हुए सारे के सारे दीदा-फाड़ अंदाज़ में …
घाव Ghav ऐसे मत छुओ घाव को घाव को पहले मन में बसाओ उतारो धीरे-धीरे हाथों में उंगलियों तक ले आओ धीरे-धीरे छुओ, फिर छुओ घाव को घाव की …
सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे Soye hue logo ke beech jagna pad raha he mujhe सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है …
जिस दिन Jis din जिस दिन अच्छी कविता लिखोगे अपनों से दूर हो जाओगे जिस दिन अच्छी कविता लिखोगे नौकरी से हाथ धो बैठोगे जिस दिन अच्छी कविता …
वह Vah आफ़िस के बाहर भी आफ़िस के भीतर के आदमी से ज़्यादा ताक़तवर है वह यहाँ तक कि आक्रामक भी डीजल की चिंता है उसे ,चिंता है बिजली …