Ancient India History Notes on “Treaty of Basi”, “बसई की सन्धि” History notes in Hindi for class 9, Class 10, Class 12 and Graduation Classes

बसई की सन्धि

Treaty of Basi

    बसई की सन्धि अथवा ‘बसीन की सन्धि’ 31 दिसम्बर, 1802 में, भारत में पूना (पुणे) के मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय और अंग्रेज़ों के मध्य हुई थी।

    यह ‘मराठा महासंघ’ को तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक क़दम था। इसके फलस्वरूप 1818 ई. में पेशवा के पश्चिमी भारत के क्षेत्रों का ईस्ट इण्डिया कम्पनी में विलय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

    इस समय ‘मराठा महासंघ’ 1800 ई. में पेशवा के मंत्री नाना फड़नवीस की मृत्यु के बाद उत्पन्न मतभेदों से जूझ रहा था।

Read More  Ancient India History Notes on “Results of World War II” History notes in Hindi for class 9, Class 10, Class 12 and Graduation Classes

    सैनिक सरदारों, दौलतराव सिंधिया तथा जसवन्तराव होल्कर ने अपनी अनुशासित सेनाओं के बल पर पेशवा की गद्दी के लिए दावेदारी पेश की।

    अक्टूबर, 1802 में होल्कर ने सिंधिया और पेशवा को पराजित किया तथा धर्मभाई को पूना की गद्दी पर बैठाया।

    बाजीराव द्वितीय भागकर बसई चला गया और अंग्रेज़ों से मदद की गुहार की।

    ‘बसई की सन्धि’ के तहत पेशवा अंग्रेज़ों की सेना की छह बटालियनों का ख़र्च वहन करने को राज़ी हुआ, जिसका ख़र्च उठाने के लिए एक इलाका प्रत्यर्पित किया गया।

    इसके साथ ही सभी यूरोपीय लोगों को सेवा से हटाने, सूरत व बड़ौदा पर दावा ख़त्म करने और अंग्रेज़ों की सलाह से ही अन्य देशों के साथ सम्बन्ध रखने की भी शर्तें मान ली गईं।

Read More  Ancient India History Notes on “Sir Thomas roe ne Jahangir se mulakar ki History notes in Hindi for class 9, Class 10, Class 12 and Graduation Classes

    बदले में आर्थर वेलेजली (जो बाद में वेलिंग्डन के पहले ड्यूक बने) ने मई, 1803 में पेशवा को पूना वापस दिला दिया।

    इस तरह से अग्रणी मराठा राज्य अंग्रेज़ों की मदद लेने लगा था।

    इस युद्ध सन्धि के परिणामस्वरूप अंग्रेज़ों और मराठों के बीच दूसरा मराठा युद्ध (1803-05 ई.) हुआ, जिसमें तीन अन्य प्रमुख मराठा शक्तियों की पराजय हुई।

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.