मधु के दिन मेरे गए बीत
Madhu ke din mere gye beet
मधु के दिन मेरे गए बीत!(२)
मैँने भी मधु के गीत रचे,
मेरे मन की मधुशाला मेँ
यदि होँ मेरे कुछ गीत बचे,
तो उन गीतोँ के कारण ही,
कुछ और निभा ले प्रीत-रीत!
मधु के दिन मेरे गए बीत!(२)
मधु कहाँ, यहाँ गंगा-जल है!
प्रभु के चरणोँ मे रखने को,
जीवन का पका हुआ फल है!
मन हार चुका मधुसदन को,
मैँ भूल चुका मधु-भरे गीत!
मधु के दिन मेरे गए बीत!(२)
वह गुपचुप प्रेम-भरीँ बातेँ,(२)
Read More Hindi Poem of Kaka Hasrati’“Panchbhoot , “पंचभूत ” Complete Poem for Class 10 and Class 12
यह मुरझाया मन भूल चुका
वन-कुंजोँ की गुंजित रातेँ (२)
मधु-कलषोँ के छलकाने की
हो गई , मधुर-बेला व्यतीत!
मधु के दिन मेरे गए बीत!(२)
