अब तो जागो !
Ab to jago
हमारे बहते आँसू
लहूलुहान मन
और तन
जिस पर
करते आए हैं
प्रहार
जाने कितने लोग
सदियाँ गुजर गईं
पीड़ाएँ भोगती रहीं
हमारी पीढियां
हमने
फूल दिए
फल दिए
और दीं
तमाम औषधियाँ
फिर भी
हम रहे
उपेक्षित
पीड़ित
अपने ही घर में
अपनों के ही बीच
अब तो जागो-
हे कर्णधारो!
क्योंकि
हम बचेंगे
तो बचेगा
धरा पर
जल और जीवन
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