Hindi Poem of Bhagwati Charan Verma’“Bsantotsav , “बसन्तोत्सव” Complete Poem for Class 10 and Class 12

बसन्तोत्सव -भगवतीचरण वर्मा

Bsantotsav -Bhagwati Charan Verma

 

मस्ती से भरके जबकि हवा

 सौरभ से बरबस उलझ पड़ी

 तब उलझ पड़ा मेरा सपना

 कुछ नये-नये अरमानों से;

गेंदा फूला जब बागों में

 सरसों फूली जब खेतों में

 तब फूल उठी सहस उमंग

 मेरे मुरझाये प्राणों में;

कलिका के चुम्बन की पुलकन

 मुखरित जब अलि के गुंजन में

 तब उमड़ पड़ा उन्माद प्रबल

 मेरे इन बेसुध गानों में;

ले नई साध ले नया रंग

 मेरे आंगन आया बसंत

 मैं अनजाने ही आज बना

 हूँ अपने ही अनजाने में!

जो बीत गया वह बिभ्रम था,

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वह था कुरूप, वह था कठोर,

मत याद दिलाओ उस काल की,

कल में असफलता रोती है!

जब एक कुहासे-सी मेरी

 सांसें कुछ भारी-भारी थीं,

दुख की वह धुंधली परछाँही

 अब तक आँखों में सोती है।

 है आज धूप में नई चमक

 मन में है नई उमंग आज

 जिससे मालूम यही दुनिया

 कुछ नई-नई सी होती है;

है आस नई, अभिलास नई

 नवजीवन की रसधार नई

 अन्तर को आज भिगोती है!

तुम नई स्फूर्ति इस तन को दो,

तुम नई नई चेतना मन को दो,

तुम नया ज्ञान जीवन को दो,

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ऋतुराज तुम्हारा अभिनन्दन!

 

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