बाद मरने के मेरे घर से यह सामाँ निकला – ग़ालिब
Baad Marne ke mere ghar se yaha sama nikla -Ghalib
बूए-गुल, नाला-ए-दिल, दूदे चिराग़े महफ़िल
जो तेरी बज़्म से निकला सो परीशाँ निकला।
चन्द तसवीरें-बुताँ चन्द हसीनों के ख़ुतूत,
बाद मरने के मेरे घर से यह सामाँ निकला।
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