Hindi Poem of Kaka Hasrati’“Kuch to Standard banao , “कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ ” Complete Poem for Class 10 and Class 12

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ – काका हाथरसी

Kuch to Standard banao –Kaka Hasrati

 

प्रकृति बदलती क्षण-क्षण देखो,

बदल रहे अणु, कण-कण देखो|

तुम निष्क्रिय से पड़े हुए हो |

भाग्य वाद पर अड़े हुए हो|

छोड़ो मित्र ! पुरानी डफली,

जीवन में परिवर्तन लाओ |

परंपरा से ऊंचे उठ कर,

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ |

जब तक घर मे धन संपति हो,

बने रहो प्रिय आज्ञाकारी |

पढो, लिखो, शादी करवा लो ,

फिर मानो यह बात हमारी |

माता पिता से काट कनेक्शन,

अपना दड़बा अलग बसाओ |

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ |

करो प्रार्थना, हे प्रभु हमको,

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पैसे की है सख़्त ज़रूरत |

अर्थ समस्या हल हो जाए,

शीघ्र निकालो ऐसी सूरत |

हिन्दी के हिमायती बन कर,

संस्थाओं से नेह जोड़िये |

किंतु आपसी बातचीत में,

अंग्रेजी की टांग तोड़िये |

इसे प्रयोगवाद कहते हैं,

समझो गहराई में जाओ |

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ |

कवि बनने की इच्छा हो तो,

यह भी कला बहुत मामूली |

नुस्खा बतलाता हूँ, लिख लो,

कविता क्या है, गाजर मूली |

कोश खोल कर रख लो आगे,

क्लिष्ट शब्द उसमें से चुन लो|

उन शब्दों का जाल बिछा कर,

चाहो जैसी कविता बुन लो |

श्रोता जिसका अर्थ समझ लें,

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वह तो तुकबंदी है भाई |

जिसे स्वयं कवि समझ न पाए,

वह कविता है सबसे हाई |

इसी युक्ती से बनो महाकवि,

उसे “नई कविता” बतलाओ |

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ |

चलते चलते मेन रोड पर,

फिल्मी गाने गा सकते हो |

चौराहे पर खड़े खड़े तुम,

चाट पकोड़ी खा सकते हो |

बड़े चलो उन्नति के पथ पर,

रोक सके किस का बल बूता?

यों प्रसिद्ध हो जाओ जैसे,

भारत में बाटा का जूता |

नई सभ्यता, नई संस्कृति,

के नित चमत्कार दिखलाओ |

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ |

पिकनिक का जब मूड बने तो,

ताजमहल पर जा सकते हो |

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शरद-पूर्णिमा दिखलाने को,

 ‘उन्हें’ साथ ले जा सकते हो |

वे देखें जिस समय चंद्रमा,

तब तुम निरखो सुघर चाँदनी |

फिर दोनों मिल कर के गाओ,

मधुर स्वरों में मधुर रागिनी |

 ( तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी ..)

आलू छोला, कोका-कोला,

 ‘उनका’ भोग लगा कर पाओ |

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ|

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