Hindi Poem of Kaka Hasrati’“Naam roop ka bhed , “नाम-रूप का भेद ” Complete Poem for Class 10 and Class 12

नाम-रूप का भेद – काका हाथरसी

Naam roop ka bhed –Kaka Hasrati

 

नाम – रूप के भेद पर कभी किया है ग़ौर ?

नाम मिला कुछ और तो शक्ल – अक्ल कुछ और

 शक्ल – अक्ल कुछ और नयनसुख देखे काने

 बाबू सुंदरलाल बनाये ऐंचकताने

 कहँ ‘ काका ‘ कवि , दयाराम जी मारें मच्छर

 विद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षर

 मुंशी चंदालाल का तारकोल सा रूप

 श्यामलाल का रंग है जैसे खिलती धूप

 जैसे खिलती धूप , सजे बुश्शर्ट पैंट में –

ज्ञानचंद छै बार फ़ेल हो गये टैंथ में

 कहँ ‘ काका ‘ ज्वालाप्रसाद जी बिल्कुल ठंडे

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 पंडित शांतिस्वरूप चलाते देखे डंडे

 देख अशर्फ़ीलाल के घर में टूटी खाट

 सेठ भिखारीदास के मील चल रहे आठ

 मील चल रहे आठ , करम के मिटें न लेखे

 धनीराम जी हमने प्रायः निर्धन देखे

 कहँ ‘ काका ‘ कवि , दूल्हेराम मर गये कुँवारे

 बिना प्रियतमा तड़पें प्रीतमसिंह बेचारे

 पेट न अपना भर सके जीवन भर जगपाल

 बिना सूँड़ के सैकड़ों मिलें गणेशीलाल

 मिलें गणेशीलाल , पैंट की क्रीज़ सम्हारी

 बैग कुली को दिया , चले मिस्टर गिरधारी

 कहँ ‘ काका ‘ कविराय , करें लाखों का सट्टा

 नाम हवेलीराम किराये का है अट्टा

 चतुरसेन बुद्धू मिले , बुद्धसेन निर्बुद्ध

 श्री आनंदीलाल जी रहें सर्वदा क्रुद्ध

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 रहें सर्वदा क्रुद्ध , मास्टर चक्कर खाते

 इंसानों को मुंशी तोताराम पढ़ाते

 कहँ ‘ काका ‘, बलवीर सिंह जी लटे हुये हैं

 थानसिंह के सारे कपड़े फटे हुये हैं

 बेच रहे हैं कोयला , लाला हीरालाल

 सूखे गंगाराम जी , रूखे मक्खनलाल

 रूखे मक्खनलाल , झींकते दादा – दादी

 निकले बेटा आशाराम निराशावादी

 कहँ ‘ काका ‘ कवि , भीमसेन पिद्दी से दिखते

 कविवर ‘ दिनकर ’ छायावदी कविता लिखते

 तेजपाल जी भोथरे , मरियल से मलखान

 लाला दानसहाय ने करी न कौड़ी दान

 करी न कौड़ी दान , बात अचरज की भाई

 वंशीधर ने जीवन – भर वंशी न बजाई

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 कहँ ‘ काका ‘ कवि , फूलचंद जी इतने भारी

 दर्शन करते ही टूट जाये कुर्सी बेचारी

 खट्टे – खारी – खुरखुरे मृदुलाजी के बैन

 मृगनयनी के देखिये चिलगोजा से नैन

 चिलगोजा से नैन , शांता करतीं दंगा

 नल पर नहातीं , गोदावरी , गोमती , गंगा

 कहँ ‘ काका ‘ कवि , लज्जावती दहाड़ रही हैं

 दर्शन देवी लंबा घूँघट काढ़ रही हैं

 अज्ञानी निकले निरे पंडित ज्ञानीराम

 कौशल्या के पुत्र का रक्खा दशरथ नाम

 रक्खा दशरथ नाम , मेल क्या खूब मिलाया

 दूल्हा संतराम को आई दुल्हन माया

‘ काका ‘ कोई – कोई रिश्ता बड़ा निकम्मा

 पार्वती देवी हैं शिवशंकर की अम्मा

 

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